नए ओवर ब्रिज की गुणवत्ता और क्वालिटी कंस्ट्रक्शन की अब परीक्षा

    गोंदिया. शहर के मध्य में स्थित पुराने पुल को बंद कर देने के बाद होने वाली भारी असुविधा को लेकर नागरिक परेशान तो हैं ही और  इसमें भी निराशा छा गई है. इस पुल की शुरुआत रेस्ट हाउस के पास से होकर इंदिरा गांधी स्टेडियम के पास तक जाती है.  जिसके कारण अधिकांश लोग इस पुल का उपयोग बड़े पैमाने पर करते रहे हैं.

    इसके अलावा नया पुल बस स्थानक के पास स्थित बीएम डब्ल्यु शो रूम के पास से शुरू होकर डा. आंबेडकर चौक के पास समाप्त होता है जिसमें पुराने पुल की तुलना में इसकी दूरी अधिक है. यही कारण है की लोग इस पुल का उपयोग कम कर पुराने पुल का उपयोग ज्यादा करते थे  लेकिन पुराने पुल को जर्जरता व विभिन्न  खामियों के कारण   बंद कर दिया गया है जिससे   सभी को   नए पुल का उपयोग करना ही  पड़ेगा.

    उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय वाले कोहमारा-गोंदिया व बालाघाट मार्ग को आपस में जोड़ने वाले रेलवे के पुराने उड़ान पुल से आवागमन बंद हो गया है. इसे बंद करने का आदेश  जिलाधीश नयना गुंडे ने दिया था. इसके लिए 4 मई की डेडलाईन दी गई थी.  इस उड़ान पुल के दोनों छोर पर बेरीकेट्स लगाए गए है. जिला प्रशासन ने जर्जर व खस्ताहाल हो चुके पुराने उड़ान पुल से आवागमन बंद कर जनहित में बड़ा निर्णय लिया है  लेकिन इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह की चर्चा की जाने लगी है.

    इसमें कहा जा रहा है कि गोंदिया शहर यह उत्तर व दक्षिण दो हिस्सों में विभाजित है जिससे 3 मुख्य मार्गों से अब तक आवागमन होता आ रहा है. जिसमें अंडरग्राउंड मार्ग, छोटा पुराना उड़ान पुल व नया बना उड़ान पुल का समावेश है.  छोटा उड़ान पुल बंद होने से लोगों को अधिक दूरी का सामना करना पड़ेगा. वहीं शार्टकट का उपयोग करने वाले वाहन चालक अंडरग्राउंड का उपयोग अधिक करेंगे. जबकि बारिश के दिनों में अंडर ग्राउंड मार्ग नागरिकों के लिए सिरदर्द साबित होता है. अंडरग्राउंड शहर की चारों ओर की नालियों का सेंटर है. जिससे बारिश के दिनों में गंदा पानी घुटनों तक भरा होता है.

    नए उड़ान पुल की सलाखे बाहर

    51 करोड़ रू. से बने नए उड़ान पुल की परीक्षा अब सही मायने में देखने मिलेगी. पुराने पुल के बंद होने से अब इस पुल पर बोझ  अधिक बढ़ जाएगा जिससे इस पुल की गुणवत्ता का पता चल पाएगा. उल्लेखनीय है कि इस उड़ान पुल की सलाखें उपर  आ गई है और  दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ गई है.  इस  दुरूस्ती की ओर प्रशासन का ध्यान नहीं है और कोई भी इसकी गंभीरता को नहीं समझ रहा है.  इस पुल के दोनों छोर पर पॅराफीट वॉल नहीं है.

    जिससे उपर में जमा बारिश का गंदा पानी नीचे से जाने वाले नागरिकों पर गिरता है जिसके कारण दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है. यह पुल समतल नहीं होने से अनेक जगहों पर बारिश का पानी भरा रहता है. यह पुल शुरू से ही बडे़ वाहनों के जाने से कंपन होता है. वहीं पुल की दीवारों पर अनेक जगह पीपल व अन्य पेड़ उग गए है. इस संबंध में भी वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया लेकिन इसे  किसी ने भी गंभीरता से नहीं लिया.  

    पुराना पुल बंद होने से नागरिक परेशान हो गए है. यह पुल बंद होने से अंडरग्राउंड मार्ग का आवागमन पहले की अपेक्षा अब बढ़ गया है.  जिसके कारण दुर्घटना होने की संभावना बढ़ गई है. गत 3-4 दिनों से अंडरग्राउंड मार्ग पर रेती पड़ी होने से आवागमन में बाधा उत्पन्न हो रही थी. फिलहाल अभी भी मार्ग पर रेती पड़ी हुई है. वैसे भी यह मार्ग काफी सकरा होने से दो बड़े वाहनों को निकलने में अधिक समय लगता है.

    इस अंडरग्राउंड मार्ग का उपयोग सूर्याटोला, टीबी टोली, आंबाटोली, रामनगर सहित अन्य लोग करते है. यह मार्ग राहगिरों के लिए   सुविधाजनक और बाजार जाने के लिए शार्टकट है. इस मार्ग पर बारिश के दिनों में अंडरग्राउंड के दोनों ओर गंदा पानी बहता है जिसके कारण आवागमन में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. सरकारी तालाब का भी पानी इस मार्ग पर आ जाता है. इस दिशा में उचित कदम उठाकर तालाब मार्ग पर आने वाले पानी की निकासी का प्रश्न सुलझाना चाहिए ऐसा इस क्षेत्र के नागरिकों द्वारा किया जाता है लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता जिसके कारण हर वर्ष बारिश के दिनों में पानी की समस्या बनी ही रहती है जिसका हल आज तक नहीं निकल पाया है.  

    नए उड़ान पुल में है रखरखाव की जरूरत

    सन 2008 में एक नए उड़ान पुल का निर्माण नागपुर की सुपर कंस्ट्रक्शन कंपनी के माध्यम से किया गया था जो जिसकी मजबुती के बारे में बड़े वाहन जाने पर पता चलता है.  सन 2008 से इस उड़ान पुल का मेंटेंनेंस नहीं किया गया. शुरू से ही इस पुल में अनेक खामियां नजर आई है.