maratha reservation
मराठा आरक्षण

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मुंबई: मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) को विधानसभा और परिषद से मंजूरी मिलने के बाद अब राज्यपाल रमेश बैस (Governor Ramesh Bais) ने भी स्वीकृति दे दी है। आरक्षण पर मंगलवार को गजट (Maratha Reservation GR) नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया।  अधिनियम के अनुसार, मराठा समुदाय के लिए नौकरियों और शिक्षा में 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है।  इसके मुताबिक मराठा समुदाय को अब नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण मिलेगा।  राज्य के सभी सरकारी शिक्षण संस्थानों में मराठा छात्रों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाएगा।  

सरकारी कार्यालयों, जिला परिषदों, स्कूलों जैसी सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण होगा।  आरक्षण का लाभ महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के माध्यम से भरे जाने वाले पदों पर भी मिलेगा, लेकिन यह भी साफ कर दिया गया है कि मराठों के लिए कोई राजनीतिक आरक्षण नहीं होगा और यह आरक्षण केंद्र में लागू नहीं होगा।  ओबीसी के आरक्षण पर असर डाले बिना मराठों को आरक्षण देने का फैसला किया गया है।  इसके लिए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट अहम हो गई है।  

कब और कैसे मिलेगा आरक्षण 

आपको बता दें कि ये आरक्षण पहले से चल रही सरकारी भर्तियों पर लागू नहीं होगा। 26 फरवरी और उसके बाद होने वाली भर्तियों के लिए मराठा समुदाय के लोगों के लिए 10 फीसदी सीटें आरक्षित रहेगी। 

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मराठा आरक्षण

2 बार मराठा आरक्षण देने की कोशिश की

राज्य में इससे पहले दो बार मराठा समुदाय को आरक्षण देने की कोशिश की गई थी।  मराठा आरक्षण पहली बार विधानमंडल में पारित किया गया था, जब पृथ्वीराज चव्हाण मुख्यमंत्री थे।  उन्होंने 13 प्रतिशत आरक्षण दिया था।  हालांकि, पृथ्वीराज चव्हाण द्वारा दिया गया 13प्रतिशत आरक्षण अदालत में टिक नहीं पाया।  फिर देवेन्द्र फड़णवीस के मुख्यमंत्री रहते दूसरी बार 1 दिसंबर 2018 से मराठा समुदाय के लिए सामाजिक और शैक्षणिक आरक्षण लागू किया गया था। 

पिछड़ा वर्ग यानी एसईबीसी वर्ग को शिक्षा में 12 प्रतिशत और सरकारी नौकरी में 13 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है।  राज्य में कुल आरक्षण 50 फीसदी से ऊपर जाने पर कोर्ट में याचिका दायर की गई।  फडणवीस द्वारा दिए गए 13 प्रतिशत आरक्षण को हाई कोर्ट ने तो मान लिया। , लेकिन सुप्रीम कोर्ट में ये टिक नहीं पाया।