Eknath Shinde Shivaji Jadhav

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नवभारत न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई:
राज्य में लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान समाप्त होने के बाद दूसरे चरण की तैयारी शुरू हो गई है। अभी भी कई सीटों पर महायुती और महाविकास अघाड़ी के दलों में असंतोष नजर आ रहा है। मराठवाडा की हिंगोली (Hingoli) सीट पर महायुती का टेंशन बढ़ा हुआ है। यहां उम्मीदवार बदले जाने के साथ साथ महागठबंधन को बगावत का सामना भी करना पड़ रहा है। हिंगोली सीट बीजेपी के विरोध के चलते शिवसेना के सांसद हेमंत पाटिल का टिकट काटकर सीएम एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने बाबुराव कदम को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी तरफ बीजेपी के शिवाजी जाधव (Shivaji Jadhav) पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने पर अमादा हैं। बताया गया कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवाजी जाधव को फोन कर उनसे समर्थन का आग्रह भी किया परंतु वे नहीं माने। शिवाजी जाधव चुनाव लड़ने के अपने फैसले पर कायम हैं। 

महायुती-एमवीए में अंदरूनी टकराव
हिंगोली लोकसभा सीट पर दूसरे चरण में मतदान होना है। वैसे यहां  महायुती और एमवीए दोनों दलों में अंदरूनी टकराव नजर आ रहा है। एमवीए की तरफ से यहां शिवसेना यूबीटी के नागेश पाटिल आष्टीकर और वंचित बहुजन आघाड़ी की तरफ से बीडी चव्हाण उम्मीदवार हैं। यूबीटी उम्मीदवार नागेश को भी कांग्रेस का सहयोग नहीं मिलता दिखाई दे रहा है। उधर शिवसेना के सांसद हेमंत पाटिल को उम्मीदवारी न मिलने से वे अब अपना सारा ध्यान यवतमाल वाशिम पर लगा रहे हैं। जहां से उनकी पत्नी राजश्री पाटिल को उम्मीदवारी मिली है।  महायुति में शिवसेना शिंदे समूह के उम्मीदवार को बाबूराव कदम को बीजेपी में बगावत से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बीजेपी के नेता रहे लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार एड शिवाजी जाधव के मैदान में डटे रहने से महायुती का सिरदर्द बढ़ गया है। जाधव का दावा है कि मैं यह चुनाव किसी का नुकसान करने के लिए नहीं बल्कि जीतने के लिए लड़ रहा हूं।  उन्होंने कहा कि 2019 के विधानसभा चुनाव में मुझे पार्टी से टिकट न मिलने पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा भरना पड़ा और तीन से चार हजार वोटों से हार गया। जाधव का दावा है कि उन्होंने वासम में बीजेपी को खड़ा किया। 

बदलता रहा है समीकरण
तीन जिलों में फैली हिंगोली लोकसभा सीट पर राजनीतिक समीकरण बदलता रहा है। हिंगोली सीट पर लंबे समय तक किसी पार्टी का कब्ज़ा नहीं रहा है। कभी कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) तो कभी शिवसेना को जीत मिली। हिंगोली लोकसभा सीट पर मराठा और दलित समुदाय का दबदबा है। दोनों ही समुदाय चुनावों में निर्णायक साबित होते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में हिंगोली सीट से कांग्रेस के टिकट पर स्व.राजीव सातव चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। सातव ने शिवसेना के सुभाष वानखेड़े 1600 वोटों के अंतर से हराया था। 

2019 में बदलाव
2019 के लोकसभा चुनाव में हिंगोली से शिवसेना युति के हेमंत श्रीराम पाटिल चुनाव जीते। उन्होंने कांग्रेस के सुभाष वानखेड़े को हराया जबकि वीबीए के मोहन फत्तूसिंग राठौड़ तीसरे स्थान पर रहे। हिंगोली लोकसभा के अंतर्गत 6 विधानसभा सीट आती है। जिसमें उमरखेड, हिंगोली, किनवट, हदगांव, वसमत, और कलमनुरी शामिल है।