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  • मंजूरी के 3 माह बाद भी नहीं मिला दिशा-निर्देश

जलगांव. किसानों के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन एग्रीकल्चर प्रोडक्ट’ (One District, One Agriculture Product) की महत्वाकांक्षी योजना को संयुक्त रूप से लागू करने का फैसला किया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य खराब कृषि उत्पादकों पर प्रक्रिया कर प्रोत्साहित करना और स्वयंरोजगार को बढ़ावा देना है। योजना को मंजूरी दिए जाने के तीन महीने बाद, इसके कार्यान्वयन के लिए स्थानीय स्तर पर कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। यह योजना अभी तक केवल कागज पर ही सिमट गई है, जिसके चलते किसानों में नाराजगी दिखाई दे रही है।

स्वयं रोजगार को बढ़ावा देने महत्वाकांक्षी योजना

केंद्र और राज्य सरकारों ने खराब होने वाले कृषि उत्पादकों पर प्रक्रिया कर स्वयं रोजगार को बढ़ावा देने के लिए, वन डिस्ट्रिक्ट, वन एग्रीकल्चर प्रोडक्शन ’की एक महत्वाकांक्षी योजना को लागू करने का निर्णय लिया है।अगले पांच वर्षों के लिए इस योजना के लिए 1हजार करोड़ रुपयों का प्रावधान किया है। जिसमें से 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकार को देना है।इस योजना के तहत किसानों, किसान उत्पादक समूहों, लघु उद्योगों और स्वयं सहायता समूहों को 35 प्रतिशत या 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी।केंद्र सरकार के प्राईम मिनिस्टर फार्मलाइजेशन ऑफ़ फ़ूड माइक्रो फ़ूड प्रोसेसिंग इस योजना के तहत राज्य के कृषि विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है।इसमें जीआई मानांकित खराब होनेवाला कृषि माल, खाद्यान्न, दालें, तिलहन, मसाला फसलें, मांस प्रक्रिया, मछली पालन, मुर्गीपालन, डेयरी और दुग्ध व्यवसाय शामिल हैं।

इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों, किसान उत्पादक समूहों, स्वयं सहायता समूहों के साथ-साथ व्यक्तिगत लाभार्थियों को पीएमएफएमई पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करना होगा।आवेदन जमा करने के बाद, इसे सत्यापित किया जाएगा और राज्य परियोजना अनुमोदन समिति द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।यह मंजूरी मिलने के बाद, संबंधित लाभार्थी के बैंक को सूचित किया जाएगा।इसके बाद, केंद्र सरकार से 60 प्रतिशत अनुदान और राज्य सरकार से 40 प्रतिशत अनुदान संबंधित लाभार्थी के खाते में जमा किया जाएगा।

35 प्रतिशत मिल सकता है अनुदान 

किसान, किसान उत्पादक संगठनों के साथ-साथ व्यक्तिगत स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने के लिए कुल लागत के लिए 35 प्रतिशत या अधिकतम 10 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए, कृषि आयुक्त ने प्रत्येक जिला कृषि अधिकारी से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।तदनुसार, राज्य के सभी जिलों की एक ‘एक जिला, एक उत्पाद’ सूची तैयार की गई है और इसे अंतिम अनुमोदन के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

किसानों के साथ मजाक

योजना की घोषणा हुए तीन महीने बीत चुके हैं।अभी तक योजना के कार्यान्वयन के लिए कोई दिशानिर्देश नहीं जारी किए गए हैं। एक तरह से यह किसानों से मजाक है।  आज तक, कई योजनाएं सामने आई हैं, हालांकि, उनके अप्रभावी कार्यान्वयन के कारण, किसानों को लाभ नहीं मिला।ऐसा ही इस योजना के साथ नहीं होना चाहिए।हम योजना के बारे में पूछताछ करने के लिए कृषि कार्यालय जाते हैं।वहां इसका कारण योजना के लिए कोई दिशा-निर्देश नहीं दिखाई देता।इस  योजना के लिए आवेदन करने की समय सीमा पूरी होने वाली है, ऐसी स्थिति में, नवभारत से बात करते हुए, अमलनेर के एक किसान देवीदास पाटिल ने मांग की है कि आवेदन करने की समय सारिणी बढ़ाकर इस योजना से जल्द से जल्द किसानों को लाभांवित किया जाए।

किसानों के प्रशिक्षण पर फैसला जल्द

इस संबंध में नवभारत से बात करते हुए, कृषि उप निदेशक अनिल भोकरे ने कहा कि ‘एक जिला, एक कृषि उत्पादन’ योजना के तहत जलगांव जिले के लिए केले की फसल का चयन किया गया है।इसमें और फसलों का समावेश किया जा सकता है ?  क्या केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा इसे लागू करने से पहले कुछ और फसलों को योजना में शामिल किया जा सकता है? इसको लेकर सोचा गया है।जलगांव जिले से केला,बैंगन और नींबू को योजना में शामिल किया गया है।योजना का कार्यान्वयन सरकार से दिशानिर्देश प्राप्त करने के बाद होगा। दूसरी ओर, किसानों के प्रशिक्षण पर निर्णय जल्द ही लिया जाएगा ऐसा भी भोकरे ने ही बताया।