Marathi signboard issue MNS protests in Pune

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पुणे: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने शुक्रवार को पुणे (Pune) के जेएम रोड इलाके में कई दुकानों पर मराठी में साइनबोर्ड (Marathi Signboard ) नहीं होने को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। राज ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बहुराष्ट्रीय ब्रांड बेचने वाली दुकानों सहित कई दुकानों पर पथराव किया और अंग्रेजी साइनबोर्ड तोड़ दिए। सोशल मीडिया पर आए वीडियो में मनसे कार्यकर्ता जेएम रोड पर आंदोलन करते नजर आ रहे हैं।

मनसे नेता अजय शिंदे ने कहा, ‘‘हमने आंदोलन किया और उन पट्टिकाओं और साइनबोर्ड को क्षतिग्रस्त कर दिया जो मराठी में नहीं थीं। उन्हें हटा कर मराठी में लिखी पट्टिकाएं और साइनबोर्ड लगाए जाने चाहिए।” उन्होंने कहा कि राज ठाकरे ने हाल ही में राज्य सरकार से उन प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था जो मराठी में साइनबोर्ड लगाने के नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। अजय शिंदे ने कहा कि चूंकि राज्य सरकार कार्रवाई नहीं कर रही है, इसलिए मनसे ने आगे बढ़कर विरोध किया। 

‘मराठी साइनबोर्ड’

जानकारी के लिए बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा ने सर्वसम्मति से मार्च में एक विधेयक पारित किया था जिसमें सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों को देवनागरी लिपि में साइनबोर्ड प्रदर्शित करने का आदेश दिया गया था। 

SC और HC ने क्या कहा 

उल्लेखनीय है कि इसके खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को मराठी में साइन बोर्ड लगाने की दो महीने की मोहलत दी थी। लेकिन यह अवधि ख़त्म होने के बाद भी कई दुकानों के बोर्ड अभी तक अंग्रेजी में ही है। इस मामले को लेकर बॉम्बे हायकोर्ट भी यह कह चुकी है कि मराठी महाराष्ट्र की मातृभाषा है और किसी भी दुकान या अन्य स्थानों के बाहर मराठी साइनबोर्ड अनिवार्य करने के नियम को भेदभाव नहीं कहा जा सकता है।

क्या कहता है कानून 

महाराष्ट्र शॉप्स एंड इस्टैब्लिशमेंट (रेगुलेशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट एंड कंडीशन ऑफ सर्विस) एक्ट 2017 में संशोधन के मुताबिक, नियम उल्लंघन करने वालों पर उनकी दुकानों में कार्यरत प्रति व्यक्ति 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इस एक्ट में यह भी कहा गया है कि मराठी भाषा में अक्षरों का फ़ॉन्ट आकार प्रमुख रूप से दिखाई देना चाहिए और साइनबोर्ड पर उपयोग की जाने वाली अन्य भाषाओं के फॉन्ट से यह बड़ा होना चाहिए।