प्रतीकात्मक तस्वीर
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    मुंबई. कोरोना (Corona) के प्रकोप के बाद राज्य में स्कूलों (Schools) को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है। वर्तमान में जहां कोरोना नहीं है उन ग्रामीण क्षेत्रों में कक्षा आठवीं से बारहवीं तक की कक्षाएं चल रही हैं। अन्य कक्षाएं भी जल्द शुरू होगी। मुंबई की महापौर किशोरी पेडणेकर ने भी मुंबई के स्कूल खोले जाने पर कहा कि दीवाली के बाद कोरोना की स्थिति का आंकलन कर स्कूल खोले जाने पर विचार किया जाएगा। 

    एक सर्वेक्षण (Survey) के अनुसार, मुंबई (Mumbai) में 67 प्रतिशत माता-पिता (Parents) अपने बच्चों को वापस स्कूल भेजने के लिए सहमत हुए हैं। प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूल के 59 % अभिभावकों के मुताबिक उनके बच्चों की पढ़ाई खराब है, जबकि घर बैठ कर पढ़ाई कर रहे बच्चे भी अब ऊब चुके हैं।

    ऑनलाइन चल रही पढ़ाई

    कोरोना के कारण अधिकांश स्कूल अभी भी बंद हैं। एक साल से बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है। इसलिए कुछ जगहों पर दसवीं और बारहवीं के छात्रों के लिए स्कूल-कॉलेज शुरू कर दिए गए हैं। इसके अलावा कोरोना मुक्त गांवो में स्कूल शुरू किया गया है। हालांकि मुंबई जैसे शहरों में स्कूल अभी भी बंद हैं, यहां ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। हाल ही में एडटेक कंपनी ने बच्चों को स्कूल भेजने पर उनके विचार जानने के लिए माता-पिता का एक सर्वेक्षण किया। इसमें 59 फीसदी अभिभावकों की राय थी कि कोरोना शिक्षा के लिए हानिकारक है। मुंबई में 67 फीसदी अभिभावक अपने बच्चों को वापस स्कूल भेजने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अगर स्कूल दोबारा शुरू हो जाए तो बच्चों को उचित शिक्षा मिल सकती है।  मेट्रो और गैर-मेट्रो शहरों में कक्षा एक से दसवीं तक के बच्चों के 10,500 अभिभावकों का सर्वेक्षण किया गया। बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, प्रमुख सर्वेक्षण में पाया गया कि 22 प्रतिशत माता-पिता ने स्कूल के कर्मचारियों को टीका लगाया जाना पसंद किया। मेट्रो शहरों में 55 प्रतिशत माता-पिता ने सामाजिक दूरी को प्राथमिकता दी और उसके बाद स्वास्थ्य सुविधाओं (54 प्रतिशत) को प्राथमिकता दी। गैर-मेट्रो शहरों में माता-पिता (52 फीसदी) ने खेल और सामाजिक दूरियों को समान महत्व दिया। 

    माता-पिता की राय को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए

    लीड के सह-संस्थापक और सीईओ सुमित मेहता ने कहा कि पिछले डेढ़ साल से शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, स्कूलों और सबसे महत्वपूर्ण छात्रों के लिए आसान नहीं रहा है। निम्न आय वर्ग के बच्चों के लिए डेटा और उपकरणों की अनुपलब्धता के कारण शैक्षिक हानि हुई। मुंबई में साठ-सत्तर प्रतिशत माता-पिता अपने बच्चों को वापस स्कूल भेजने के लिए तैयार हैं। जबकि 33 फीसदी अभिभावक अभी अपने बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं हैं। मेहता ने कहा कि माता-पिता की राय को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसलिए ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखनी चाहिए। गैर-मेट्रो शहरों में, केवल 40 प्रतिशत बच्चे पर्सनल कंप्यूटर पर पढ़ते हैं। मेट्रो शहरों में 60 फीसदी अभिभावकों ने कहा कि लॉकडाउन के एक साल बाद भी उनके बच्चे कंप्यूटर/लैपटॉप पर पढ़ाई कर रहे हैं। इससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि अधिकांश छात्रों ने स्मार्टफोन के माध्यम से स्कूली शिक्षा ली है।

     ऑनलाइन शिक्षा के बारे में अधिक चिंतित

    गैर-मेट्रो शहरों में माता-पिता मेट्रो शहरों की तुलना में बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा के बारे में अधिक चिंतित हैं। मेट्रो सिटी में 53 फीसदी अभिभावकों ने समस्या समाधान और तार्किक सोच को सबसे ज्यादा महत्व दिया है। गैर-मेट्रो शहरों में यह आंकड़ा 47 फीसदी था। मेट्रो शहरों में 50 प्रतिशत से अधिक माता-पिता ने  जबकि गैर-मेट्रो शहरों में केवल 45 प्रतिशत ही डिजिटल साक्षरता को अधिक बताया है। मेट्रो और गैर-मेट्रो शहरों में 70 फीसदी माता-पिता ने कहा कि वे अपने बच्चों की शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया है। मेट्रो शहरों 21 फीसदी मातओं ने बच्चों पर ध्यान दिया है।