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    मुंबई: बीएमसी (BMC) का स्वास्थ्य विभाग (Health Department) मुंबई (Mumbai) में टीबी नियंत्रण और रोकथाम के लिए अब घर-घर (Door-to-Door) जाकर मरीजों (Patients) की जांच करेगा। मुंबई के टीबी के 24 जिले हैं जिसमें 54 यूनिट बनाई गई है। यह सभी यूनिट घर-घर जाकर लोगों की जांच करेगी। यह जांच 15 नवंबर से 25 नवंबर तक की जाएगी। इस जांच अभियान में बीएमसी करीब 17 लाख तक पहुंच कर उनकी जांच करेगी। यह सर्वे (Survey) सुबह 9 से शाम 4 बजे तक होगा। बीएमसी स्वास्थ्य अधिकारी मंगला गोमरे ने लोगों से टीबी जांच टीम के साथ सहयोग करने की अपील की है।

    मंगला गोमारे ने बताया कि बीएमसी इस वर्ष में पहली बार 15 नवंबर से 25 नवंबर 2021 तक ‘स्पेशल एक्टिव केस फाइंडिंग’ लागू किया है। इस अभियान के तहत 54 टीबी इकाई क्षेत्रों में करीब 17 लाख लोगों की टीबी की जांच की जाएगी।

    बीएमसी की 876 टीमें काम करेंगी

    इस निरीक्षण अभियान के लिए बीएमसी की 876 टीमें काम करेंगी। टीम सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक अपने कार्यक्षेत्र में घरों का दौरा कर तपेदिक रोग की जांच करेगी। यदि घर में व्यक्ति काम या अन्य कारणों से बाहर है, तो टीम दिन के अन्य समय में भी दौरा कर उनकी जांच करेगी।

    नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी

    प्रारंभिक जांच के दौरान मिले संदिग्ध मरीजों की एक्स-रे जांच की जाएगी। यह जांच मरीज के घर के पास एक सरकारी या बीएमसी प्रयोगशाला में की जाएगी। संदिग्ध मरीज को एक्स-रे जांच के लिए एक विशेष ‘वाउचर’ दिया जाएगा। इससे संदिग्ध मरीज नामित किए गए निजी एक्स-रे केंद्र में मुफ्त में जांच कराने की सुविधा मिलेगी। अभियान के दौरान क्षय रोग से ग्रसित रोगियों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी।

    यह हैं टीबी के लक्षण

    बीएमसी की सहायक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रणिता टिपरे ने बताया कि 14 दिन से ज्यादा खांसी, 2 हफ्ते से ज्यादा बुखार या शाम को बुखार, वजन कम होना, बलगम से खून आना, सीने में दर्द और गले में सूजन तपेदिक के लक्षण हैं। ऐसे लक्षण पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को तुरंत बीएमसी या सरकारी अस्पताल में तपेदिक की जांच करानी चाहिए। यह जांच पूरी तरह से मुफ्त है। टिपरे ने कहा कि जिन लोगों का टीबी का पारिवारिक इतिहास है या जिन्हें पहले टीबी हो चुका है, उन्हें टीबी के लक्षणों के बारे में अधिक जागरूक होने की जरूरत है।  जो लोग तपेदिक से संक्रमित हो गए हैं, उन्हें दवा का एक नियमित कोर्स पूरा करके ठीक किया जा सकता है। इसके लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा का सेवन करना बेहद जरूरी है।