maratha reservation
मराठा आरक्षण

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मुंबई: मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) के संबंध में जारी अधिसूचना को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) में एक ‘कैविएट’ (Caveat) दायर किया गया है।  याचिकाकर्ता ने मांग की है कि मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के खिलाफ याचिका दायर करने से पहले हमारी राय सुने बिना एकतरफा आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए।  

याचिकाकर्ता प्रशांत भोसले ने अपने वकील अतुल पाटिल के जरिए कोर्ट में अर्जी दायर करके अपना पक्ष रखने के लिए 48 घंटों की मोहलत देने का अनुरोध किया है।  बता दें कि मराठा आरक्षण के लिए मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई में आंदोलन का ऐलान किया था।

  

मनोज अपने लाखों समर्थकों के साथ वाशी (नई मुंबई) तक पहुंच भी गए थे।  जिसके बाद दबाव में आई महाराष्ट्र सरकार और सीएम एकनाथ शिंदे ने प्रदर्शनकारियों की मांग मान ली थी।  

इसके लिए तब कुणबी रिकॉर्ड वाले मराठा समाज के लोगों और उनके रिश्तेदारों को ओबीसी कोटे से आरक्षण देने की अधिसूचना जारी की गई थी।  कुछ नेताओं ने इस अधिसूचना के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने और अदालत में अपील करने का ऐलान किया था।  इसी पृष्ठभूमि में भोसले ने उच्च न्यायालय में ‘कैविएट’ आवेदन दायर किया है।