Dengue
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    मुंबई: बारिश के थमने से मुंबई सहित ठाणे, कल्याण, नवी मुंबई (एमएमआर रीजन) में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। एडीज मच्छरों के काटने से डेंगू (Dengue) का प्रकोप बढ़ रहा है। मुंबई (Mumbai) में काफी दिनों से डेंगू, मलेरिया (Malaria) जैसी संक्रामक बीमारियां का प्रकोप जारी है। सितंबर के शुरुआती चार दिनों में डेंगू मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सिर्फ चार दिनों में डेंगू के 29 पेशेंट्स मिले हैं। यदि ऐसे ही बढ़ने की गति जारी रही तो डेंगू की बीमारी के मामले में सितंबर महीना काफी खतरनाक हो सकता है। 

    वैसे अगस्त माह में डेंगू के 169 पेशेंट्स मिले थे। इसके अलावा अगस्त में मलेरिया के 787, लेप्टो के 63 और स्वाइन फ्लू के 189 मामले दर्ज किए गए थे। सितंबर के शुरुआती चार दिनों में स्वाइन फ्लू के 3 मामले मिले हैं। स्वाइन फ्लू के मामले में कुछ कमी आई है, लेकिन आगे बारिश पर निर्भर है। यदि बारिश हुई तो यह बीमारी बढ़ सकती है। अगस्त माह में स्वाइन फ्लू के 105 मामले दर्ज किए गए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस हिसाब से डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं, उससे यदि रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो काफी भयावह स्थिति हो सकती है।

    जमे हुए पानी को चेंज करें

    संक्रामक रोग विशेषज्ञ और एमडी (भानुज्योत हॉस्पिटल) डॉ. जतिन हरबड़ा ने कहा कि बारिश के बाद पानी हर जगह ठहर जाता है, इसलिए ठहरे हुए पानी को फेंक देना चाहिए। जमे हुए पानी में डेंगू और मलेरिया के मच्छर ज्यादा होते हैं। इन मच्छरों के काटने से डेंगू और मलेरिया की बीमारी तेजी से फैलती है। तेज बुखार होना, सर्दी-खासी आना, पैरों दर्द सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द आदि डेंगू के लक्षण हैं। डॉ. जतिन ने कहा कि आमतौर पर मरीज इलाज से 4-5 दिन में ठीक हो जाता है। जिस पेशेंट को ज्यादा दिक्कत होती, बॉडी में वाइरस ज्यादा चला जाता है उसे एडमिट करना पड़ता है। डेंगू-मलेरिया के लक्षण होने पर मरीज को तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

    बीएमसी की सलाह

    बीएमसी ने सलाह दिया है कि डेंगू बीमारी से बचने के लिए सावधानी के सभी उपाय अपनाएं और ऐसे मच्छरों के प्रजनन को रोका जाए। शरीर के ढकने के लिए कम्प्लीट कपड़े पहनें। मच्छरों के काटने से बचें। एडीज मच्छरों के प्रजनन को रोकें, ये मच्छर ज्यादातर दिन में काटते हैं। अपने घर और आसपास के स्थानों को स्वच्छ रखना चाहिए। प्लास्टिक पन्नियों, नारियल कवर, गमले, थर्माकोल के बाक्स आदि में स्थिर पानी को फेंद देना चाहिए, क्योंकि इनमें बारिश का पानी स्थिर हो जाता है। बीएमसी के अनुसार मरीज को स्वयं इलाज नहीं करना, चाहिए वल्कि नजदीकी क्लीनिक में संपर्क करना चाहिए।