Drug Addict in Aarey

Loading

गोरेगांव: सरकारी संस्थाएं समाज को नशा मुक्त करने का सपना देख रही है, लेकिन पुलिस और सरकार की अनदेखी व उचित व्यवस्था की कमी के चलते मुंबई का आरे लगातार नशे की गिरफ्त में आ रहा है। गोरेगांव आरे कॉलोनी के दुर्गा नगर और गौतम नगर के युवा वर्ग पर नशे का संकट मंडरा रहा है। खुलेआम सड़क पर नशा करते नशेड़ियों ने यहां का माहौल ख़राब कर दिया है। स्थानीय यात्री नशेड़ियों से त्रस्त हो गए हैं। ड्रग्स की बिक्री को लेकर भी समाजसेवियों ने चिंता जताई है। 

स्थानीय राहगीरों का जीना हुआ दूभर 
दुर्गा नगर व गौतम नगर को जोडने वाला रास्ता इन दिनों नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है। शाम के समय यहां पर न तो कोई सुरक्षा कर्मी और न ही कोई चौकीदार होता है। शाम होते ही यह रास्ता नशेड़ियों का पनाहगार बन जाता है। इस रास्ते पर नशेड़ी नशा करते है और नशीले पदार्थ बेचते भी हैं। कभी कभी यह रास्ता राहगीरों के लिए परेशानी का सबब भी बन जाता है। लेकिन नशेड़ियों के खौफ के कारण राहगीर पुलिस से शिकायत करने से भी कतराते है। क्योंकि नशेड़ी भी स्थानीय ही होते हैं और वो राहगीरों को पहचानते हैं। 

पुलिस को है खबर 
ऐसा नहीं है कि इसकी ख़बर पुलिस को नहीं है, स्थानिक नागरिक, समाज सेवकों ने पुलिस को मौखिक रुप से कई बार इसकी जानकारी दी है। पुलिस ने कारवाई भी की है, लेकिन नशेड़ीयो के हौसले इतने बुलंद है की प्रशासन पस्त है। ऐसे में राज्य सरकार का नशामुक्त समाज का सपना हवा हवाई साबित हो रहा है। 

नशेड़ियों को लोकल गुंडे का स्पोर्ट 
नाम ना छापने कि शर्त पर एक स्थानिक व्यक्ति ने नवभारत को बताया कि कई बार इन रास्तों पर नशेडियो के चलते मारपीट जैसी घटना घटित हुई है, लेकिन पुलिस के संज्ञान मामला जाने के बाद नशेड़ियों को भी बचाने के लिए समाज के कुछ लोग सामने आ जाते है। 

विपक्ष ने दी चेतावनी 
कांग्रेस ब्लाक अध्यक्ष, बालकृष्ण तिवारी ने कहा, यदि इन रास्तों पर यूं ही नशेड़ियों का कब्जा रहा तो मजूबर कांग्रेस पार्टी प्रशासन के खिलाफ़ मोर्चा खोलने को बाध्य होगी। क्योंकि मैं भी इसी रास्तों से आता जाता हूं और देखता हूं, कि नशे में चूर व्यक्ति राहगीरों को परेशान करते है। आम आदमी कानून हाथ में ले इससे पहले प्रशासन को इस पर लगाम लगाने कि जरूरत है। 

स्थानीय लोगों में गुस्सा 
इंद्रजीत सागर नाम के राहगीर ने बताया, इस रास्ते पर पुलिस सुरक्षा बल तैनात करने कि जरूरत है, क्योंकि नशेडी नशे में कुछ भी कर गुजर सकते हैं। पुलिस सही मायने में चाह ले तो आरे में एक नशे की एक पुड़ी तक नहीं बिक सकती। पुलिस प्रशासन को इस पर ध्यान देने कि जरूरत है। वहीं धर्मेन्द्र ताक नाम के स्थानीय ने बताया, प्रशासन को नशे के मकड़ जाल को जल्द ही काटना चाहिए, क्योंकि नशा एक बीमारी कि तरह है, जो सब कुछ बर्बाद करा देता है, नशेड़ियों को देखकर आने वालीं पीढ़ी की चिंता हो रही है।