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    -अरविंद सिंह

    मुंबई: भारत की तेजी से बढ़ती सामरिक ताकत में नौसेना (Navy) की प्रमुख भूमिका रही है। हिंद महासागर (Indian ocean)में चीन (China) और अरब सागर (Arabian Sea) में पाकिस्तान (Pakistan) से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत (India) ने अपनी सागरीय ताकत को काफी मजबूत किया है। हाल के वर्षों में ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Atmanirbhar Bharat) के तहत नौसैनिक बेड़े में कई पनडुब्बियां (Submarines) और अत्याधुनिक तकनीक से युक्त युद्धपोत (Warship) शामिल हुए हैं। कई नए तरीके के अत्याधुनिक विमान भी भारतीय नौसेना की शान बढ़ा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इंडियन नेवी दुनिया की टॉप-5 नेवीज में अपना स्थान बना चुकी है। 2021 के अंत में ब्रम्होस और बराक मिसाइलों से युक्त विध्वंसक ‘आईएनएस विशाखापत्तनम’ और ‘आईएनएस वेला’ जैसी सबमरीन के शामिल होने से इंडियन नेवी काफी मजबूत हुई है। 2022 में कई ऐसे युद्धपोत, पनडुब्बियां और खासकर ‘आईएनएस विक्रांत’ जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर नौसेना के बेड़े में शामिल होने वाले हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नए साल में इंडियन नेवी की ताकत में काफी तेजी से इजाफा होगा।

    आईएनएस विक्रांत

    भारत का यह पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर है। ‘विक्रांत’ कोचीन शिपयार्ड द्वारा बनाया गया है। ‘आईएनएस विक्रांत’ अपने समुद्री ट्रायल पर है। भारत के नौसेना अध्यक्ष एडमिरल आर हरि कुमार के अनुसार यह एयरक्राफ्ट कैरियर इस साल अगस्त में नौसेना के जंगी बेड़े में शामिल होगा। 40,000 टन वजनी इस एयरक्राफ्ट के कई ट्रायल हो चुके हैं। ‘विक्रांत’ को भारतीय नौसेना गहरे समुद्र में जटिल युद्धाभ्यास के लिए परीक्षण कर रही है। इसके निर्माण ने भारत को उन चुनिंदा देशों के वर्ग में शामिल कर दिया है, जिनके पास अत्याधुनिक विमानवाहक पोत बनाने की क्षमता है। अभी भारत के पास सिर्फ एक विमान वाहक पोत ‘आईएनएस विक्रमादित्य’ है।

    विध्वंसक ‘मोरमुगाओ’ 

    गोवा मुक्ति दिवस के अवसर पर प्रोजेक्ट 15 बी श्रेणी का दूसरा स्वदेशी स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक ‘मोरमुगाओ’ को समुद्री परीक्षणों के लिए समुद्र में उतारा जा चुका है। भारतीय नौसेना, पश्चिमी कमान के प्रवक्ता ने बताया कि इस विध्वंसक को भी 2022 में कमीशन किया जाएगा।

    ‘वागीर’ पनडुब्बी 

    पांचवी स्टील्थ स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी ‘आईएनएस वागीर’ 2020 के अंत में लांच हुई थी। यह भी इसी साल नौसेना में शामिल होगी। जानकारों का कहना कि इसके समुद्री ट्रायल अंतिम चरण में हैं। खास बात यह कि इन सभी युद्धपोत और पनडुब्बियों में 75 प्रतिशत से अधिक तकनीक व कलपुर्जे स्वदेशी हैं, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत देश के लिए बहुत बड़ी उपल्ब्धि है।

    परमाणु पनडुब्बी 

    वर्तमान में भारतीय नौसेना में ‘आईएनएस अरिहंत’ नाम की एकमात्र परमाणु पनडुब्बी कार्यरत है। जानकारों के अनुसार भारत में बन रही अरिहंत श्रेणी की दूसरी परमाणु पनडु्ब्बी ‘रिधमान’ भी इसी वर्ष नौसेना बेड़े में शामिल होगी, लेकिन नौसेना ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।