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    मुंबई.  वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को लेकर आईपीसीसी ने एशिया (Asia) के देशों को कड़ी चेतावनी जारी की है।  अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) की रिपोर्ट में धरती के  बढ़ते तापमान (Rising Temperature) की वजह से समुद्र का जलस्तर बढ़ने की चेतावनी दी गई है।  यह रिपोर्ट करीब 80 साल बाद यानी 2100 तक की तस्वीर दिखाती है।  इसमें कहा गया है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से भारत (India) के 12 तटीय शहर 3 फीट तक पानी में डूब जाएंगे।  ऐसा लगातार बढ़ती गर्मी से ध्रुवों पर जमी बर्फ के पिघलने से होगा।  देश के जिन शहरों में खतरा है उसमें मुंबई (Mumbai), चेन्नई (Chennai), कोच्चि (Kochi) और विशाखापत्तनम (Visakhapatnam) शामिल हैं।    

     रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन की वजह से ग्लेशियर पिघलने का असर भारत के ओखा, मोरमुगाओ, कंडला, भावनगर, मुंबई, मैंगलोर, चेन्नई, विशाखापट्टनम, तूतीकोरन, कोच्चि, पारादीप और पश्चिम बंगाल के किडरोपोर तटीय इलाके पर पड़ेगा।  ऐसे में भविष्य में इन इलाकों में रह रहे लोगों को यह जगह छोड़नी पड़ सकती है।  नासा ने एक सी लेवल प्रोजेक्शन टूल बनाया है।  इससे समुद्री तटों पर आने वाली आपदा से वक्त रहते लोगों को निकालने और जरूरी इंतजाम करने में मदद मिलेगी।  इस ऑनलाइन टूल के जरिए कोई भी भविष्य में आने वाली आपदा यानी बढ़ते समुद्री जलस्तर का पता कर सकेगा। 

    मैदानी इलाकों में भी खतरा 

    बताया गया है कि वर्ष 2100 तक दुनिया का तापमान काफी बढ़ जाएगा।  लोगों को भयानक गर्मी झेलनी पड़ेगी।  कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण नहीं रोका गया तो तापमान में औसतन 4. 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी।  अगले दो दशक में तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा।    

    सदी के अंत में समुद्र तट पर बसे ‘ये’ शहर खतरे में!

    • कांडला – 1.87 फीट
    • ओखा – 1. 96 फीट
    • भावनगर – 2.70 फीट
    • मुंबई – 1.90 फीट
    • मोरमोगाओ – 2.06 फीट
    • मैंगलोर – 1.87 फीट
    • कोचीन – 2.32 फीट
    • पारादीप – 1.93 फीट
    • खिदिरपुर – 0.49 फीट
    • विशाखापत्तनम – 1.77 फीट
    • चेन्नई – 1.87 फीट
    • तूतीकोरिन – 1.9 फीट