नहीं हो रही धुलाई, भुखमरी की नौबत आई, कंगाली के कगार पर महालक्ष्मी का धोबी समाज

धोबीघाट को लॉकडाउन का ‘धोबी पछाड़’

मुंबई. वैश्विक महामारी कोरोना के कारण 2 महीने पहले लगाए गए लॉकडाउन से महालक्ष्मी का ऐतिहासिक धोबीघाट बंद पड़ा है. कोरोना के खौफ ने यहां काम करने वाले प्रवासी मजदूरों में इस कदर खौफ भर दिया कि वे एक साथ ही गांव की ओर पलायन कर गए. इसके चलते महालक्ष्मी के प्राचीन धोबीघाट के सभी 738 पत्थरों पर सन्नाटा पसरा हुआ है. लॉकडाउन ने धोबीघाट को ऐसा धोबी पछाड़ दिया है कि यहां घाट के मालिकों के सामने परिवार पालना मुश्किल हो गया है.

घाट के मजदूरों का एक मुश्त गांव पलायन

मुंबई के धोबीघाट का अपना इतिहास है. यहां प्रतिदिन मुंबई के अनेक स्थानों से लाखों कपड़े धुलाई के लिए आते हैं. मनपा ने यहां 738 पत्थरों (घाट) की अनुमति दी है जहां बनाई गई पानी की टंकियों पर रखे गए पत्थरों पर कई हजार मजदूर काम करते हैं. लॉकडाउन से जहां धोबी घाट पर कपड़ों की धुलाई आदि के कार्य बंद पड़े हैं, वहीं यहां काम करने वाले मजदूर भी गांव चले गए हैं.  अब इन लोगों के पास न तो काम है और न ही खाने का इंतजाम है. 2 महीने तक किसी तरह परिवार चलाने वाले धोबी समाज के सामने भुखमरी की नौबत आ गयी है. भारतीय धोबी समाज ने राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर धोबी समाज के मजबूर परिवारों के लिए मदद करने की मांग की है.

विशेष राहत दे राज्य सरकार

कोरोना संकट की इस घड़ी में धोबी (परीट) समाज के सामने काम धंधा बंद होने से भुखमरी की नौबत आ गई है. सरकार को मानवीय आधार पर इस समाज के लिए विशेष राहत राशि देनी चाहिए.

-शंकर विद्यादीन रजक, अध्यक्ष भारतीय धोबी समाज

कोई विकल्प नहीं है

हमारे पास लोगों के कपड़े धोने के अलावा और कोई काम धंधा नहीं आता है. इसी अब हम कई पीढ़ियों से अपने परिवार का पालन करते आ रहे हैं. इसके अतिरिक्त हमारे पास कोई विकल्प नहीं है.

– लवकुश कनोजिया, महालक्ष्मी धोबीघाट

कोरोना के डर से काम नहीं

लोगों में कोरोना का डर इस कदर बैठ गया है कि वे अपने कपड़ों के साथ चद्दर आदि भी धो ले रहे हैं. हमारे साथ जुड़े लांड्री वालों के पास भी कपड़े नहीं आ रहे हैं. – धरम कनोजिया, महालक्ष्मी धोबीघाट

परिवार पालना हुआ मुश्किल

कोरोना की आफत ने हमें इस तरह लाचार कर दिया है कि अब तो परिवार पालना मुश्किल कर दिया है. बाजारों में बढ़ती स्पर्धा, बढ़ते रेट भी हमें परेशान कर रहे हैं. इसके ऊपर लॉक डाउन की महाबंदी ने कंगाल बना दिया है-रमेश कनोजिया, महालक्ष्मी धोबीघाट