रेलवे के यात्री भी बढ़ने लगे और कमाई भी

    -आनंद मिश्र

    मुंबई: लॉकडाउन (Lockdown) की विदाई और सामान्य गतिविधियों की रिकवरी का सीधा-सीधा असर रेल‍वे यात्रा पर पड़ा है जो अब फिर से अपनी पुरानी रफ़्तार पकड़ने की लय में है। आरटीआई (RTI) और रेलवे (Railway) से प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि अब टिकटों की बुकिंग (Booking Tickets) लगभग पुराने स्तर पर लौट रही है और साल की समाप्ति से पहले ही रेल यात्रियों की संख्या कोविड से पहले के आंकड़े पर आ जाएगी। 

    आरटीआई एक्टिविस्ट मनोरंजन रॉय द्वारा फाइल आरटीआई से पता चलता है कि साल 2019-20 में (लॉकडाउन से ठीक पहले) रेलवे ने आईआरसीटीसी के जरिए हर महीने 9.03 करोड़ रुपए बतौर जीएसटी अदा किया था, जो लॉकडाउन के दरमियान गिरकर 4.48 करोड़ प्रति महीने हो गया था। पर जब दूसरी लहर के ढलान के बाद स्थितियां थोड़ी सामान्य हुई तो जीएसटी का यह आंकड़ा 7.23 करोड़ रुपए प्रति महीने पहुंच गया है।

    लोग अब अपना ट्रैवल प्लान करने लगे

    बढ़े हुए जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े यह बताते हैं कि लोग फिर लोग अब अपना ट्रवेल प्लान कर टिकट बुक कराने लगे हैं। आंकड़ों के अनुसार, इस साल अक्टूबर के पहले आठ दिनों में शुद्ध यात्री बुकिंग (आरक्षित) 225.95 लाख रही, जो 2019 की इसी अवधि में 130 लाख बुकिंग से लगभग 74% अधिक है। यही नहीं, भारतीय रेलवे का नेट रेवेन्यु भी इसी अवधि के दौरान 43% बढ़कर 1,066.85 करोड़ हो गया, जबकि अक्टूबर 2019 के पहले आठ दिनों के दौरान यह रेवेन्यू 745.66 करोड़ था। ऐसा टीकाकरण के बाद सामान्य हो रही परिस्थिति और त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ हुआ है और दिवाली तक यह आंकड़ा बढ़ने की उम्मीद है।

    ट्रेनों की संख्या भी बढ़ने लगी

    सेंट्रल रेल के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान एक समय भी समय था जब सिर्फ पैसेंजर ट्रेनों में सिर्फ प्रवासी ट्रेनें चला करती थी। जैसे-जैसे परिस्थितियां सामान्य होने लगीं, वैसे- वैसे रेलवे अपनी ट्रेनों के दरवाजे पैसेंजरों के लिए खोला। 8 अक्टूबर तक, भारतीय रेलवे औसतन 1,701 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें चला रहा था, जिसमें हॉलिडे स्पेशल भी शामिल है, जो कि महामारी के पहले के औसत 1,768 ट्रेनों से बस थोड़ा ही पीछे है। सेंट्रल रेलवे जो लॉकडाउन के पहले रोजाना औसतन 278 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें चलाती थी, अब वह 220 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें चलाने लगी है।

    10 सालों में दिया 371 करोड़ का सर्विस टैक्स/जीएसटी

    मनोरंजन रॉय को दिए जवाब में आईआरसीटीसी ने कहा है कि साल 2011-12 से साल 2021-22 (जुलाई 2021 तक) के दरमियान इसने भारत सरकार को कुल 371 करोड़ का सर्विस टैक्स और जीएसटी अदा किया जिसे यात्रियों से बतौर सर्विस चार्ज या सुविधा फीस वसूल किया गया था। इसमें 225 करोड़ का सर्विस टैक्स (22 नवंबर 2016 तक) और 146 करोड़ का जीएसटी शामिल था। याद रहे कि नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए 22 नवंबर 2016 से 31 अगस्त 2019 तक डिजिटल पेमेंट करने पर सर्विस चार्ज हटा लिया था। बाद में 1 सितंबर 2019 से कन्वीनियंस फीस चार्ज करना शुरू किया।

    तीन चौथाई टिकट ऑनलाइन निकल रहे  

    पहले टिकट लेने के लिए घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ता था। फिर तीन अगस्त 2002 को पहली बार भारतीय रेलवे ने घर बैठे इंटरनेट के जरिए टिकट बुक कराने की सुविधा शुरू की थी और पहले दिन सिर्फ 27 टिकट बुक हुए थे। आज रोजाना लाखों टिकट ऑनलाइन बुक किए जाते हैं। आईआरसीटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल कुल रीज़र्व्ड टिकट का तीन चौथाई टिकट ऑनलाइन बुक किया जाता है, जो आने वाले दिनों में और भी बढ़ने वाला है। अब तो भारतीय रेलवे ने अनरिज्वर्ड यानी अनारक्षित टिकट बुक करने के लिए यूटीएस एप विकसित कर लिया है जिसके वर्तमान में लगभग 1.47 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर्स हैं। रेल टिकटों में एजेंटों की सेंधमारी रोकने के लिए अब वे यूजर जिनका आधार कार्ड नंबर आईआरसीटीसी की वेबसाइट से लिंक है, वे अब एक महीने में 12 रेल टिकट बुक कर सकते हैं।

    एक तरफ मोदी सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ उन पर तरह तरह के टैक्स और चार्ज थोपे जा रहे हैं, जो कि सरासर गलत है। सरकार को चाहिए कि वह हर डिजिटल पेमेंट को किसी भी टैक्स या चार्ज से मुक्त करे और कन्वीनियंस तुरंत हटाए।

    -मनोरंजन रॉय, आरटीआई एक्टिविस्ट