India gave a shock of 4000 crores to China

  • ‘कूरियर’ और ‘पोस्ट’ में कोरोना का सन्नाटा
  • लॉकडाउन से बहन-भाई के मिलन में दूरी
  • सोशल डिस्टेंसिंग बनेगी राखी की मजबूरी
  • अब ऑनलाइन होगी राखी की रश्म अदायगी

मुंबई. वैश्विक महामारी कोरोना के इस संकट काल में भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन फीका होने जा रहा है. राखी के एक महीने पहले से ही डॉक और कूरियर से दूर देश में रहने वाले भाईयों को बहनों द्वारा राखी भेजने की परंपरा पहली बार खंडित हुई है. सभी पोस्ट ऑफिसों और कूरियर कार्यालयों में राखी के लिफाफों का अकाल पड़ा हुआ है.

रक्षाबंधन और दिवाली पर लिफाफे और गिफ्ट बॉक्स की डिलीवरी कर टिप (बख्शीश) पाने की डाकियों की उम्मीद पर भी पानी फिर गया है. सुरक्षा की दृष्टि से लगाए गए लॉकडाउन के कारण इस साल रक्षाबंधन पर भाई-बहनों के मिलन पर संशय उत्पन्न हो गया है. हां 3 अगस्त रक्षाबंधन पर ऑनलाइन से न केवल शुभकामनाओं की रश्म अदायगी की जाएगी बल्कि भाई और बहन एक दूसरे से कुशलक्षेम पूंछकर स्वतः खरीदी गई राखी बांध लेंगे. बहनों ने भी फोन से भाइयों को मजबूरी बताकर स्वयं राखी खरीदने के लिए कह दिया है. कोविड के कारण जारी सोशल डिस्टेंसिंग के चलते न तो भाई बहन के घर और न ही बहन भाई के घर जा सकेंगी.

चीन को 4 हजार करोड़ का जबरदस्त घाटा उठाना पड़ा

राखी के त्यौहार पर देश में लगभग 6 हजार करोड़ की राखियों का व्यापार होता है, जिसमें चीन से लगभग 4 हजार करोड़ की राखी आयात की जाती थी. लद्दाख की सीमा पर भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले चीन पर कसे गए शिकंजे के चलते इस साल चीन से राखी आयात नहीं की गई. नतीजतन चीन को 4 हजार करोड़ का जबरदस्त घाटा उठाना पड़ा है. इसके चलते भारत के राखी कारोबारियों ने संगठित होकर चीन को चाटा मारते हुए देश में ही बनी राखियों के कारोबार करने का निर्णय लिया है. राखी पर चीन से बनी हुई राखियां आती थीं, साथ ही राखी बनाने का कच्चा सामान, जैसे फोम, कागज़ की पन्नी, राखी धागा, मोती, बूंदे, राखी के ऊपर लगने वाला सजावटी सामान आदि भी आयात होता था. कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने चीनी वस्तुओं के बहिष्कार अभियान के अंतर्गत इस वर्ष राखी को हिंदुस्तानी राखी के साथ मनाने तथा कारोबार करने का प्रण किया है. कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को हिंदुस्तानी ‘मोदी’ राखी भेंट की. साथ ही देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे वीर जवानों के लिए कैट की महिला उद्यमियों की ओर से 10 हजार 400 राखियां राजनाथ सिंह को प्रदान की. देश के सभी राज्यों के विभिन्न शहरों के प्रमुख बाज़ारों में कैट के व्यापारी नेता और महिला उद्यमी स्टॉल लगा कर इन राखियों को लोगों को बेचेंगे. इन राखियों की क़ीमत 10 रुपए से लेकर 50 रूपये तक है.

पहली बार नहीं बांध पाऊंगी राखी

रक्षाबंधन पर महीने पहले से ही भाई के घर जाकर राखी बांधने की प्लानिंग करती थी. राखियों के चयन में कई दिन लग जाते थे. क्या उपहार देना है इसको लेकर भी परिवार में चर्चा होती थी लेकिन इस बार यह सब नहीं हो पाया. -संगीता खेतान, मालाड

लॉक डाउन से भाई नहीं आएगा

अक्सर रक्षाबंधन पर कभी भाई मेरे घर आते हैं कभी मैं परिवार के साथ उनके घर जाती थी लेकिन इस वर्ष सोशल डिस्टेंसिंग के कारण न तो हम जा पाएंगे और न भाई ही हमारे घर आ पायेगा. अब तो बस फोन से ही राखी के दिन भाई और भतीजों से संपर्क हो पायेगा.

-सुनीता पटहार, भंडारी स्ट्रीट

क्या करें, जान है तो जहान है

कोरोना के चलते सब बेकार हो गया है. न तो भाई को राखी भेज पायी और न ही बांध पाऊंगी.अब तो बस फोन का ही सहारा है. क्या करें कोरोना से सावधानी तो रखनी ही पड़ेगी. क्योंकि जान है तो जहान है. फोन पर कह दिया है राखी ले लेना.-विजयलक्ष्मी पांडेय, नल बाजार

चीनी नहीं, देशी राखी को अपनाया

इस बार चीनी सस्ती राखियों का मोह छोड़कर मैंने देशी राखी भाई के लिए खरीदा है. कोरोना के चलते अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. राखी के त्योहार पर भी पूरा असर है. भाई उड़ीसा में रहता है अब उससे फोन पर ही मुलाकात होगी. -नीलाबेन सोनी, बोरीवली

चुनौतियों के बीच संतुष्टि

चीनी कच्चा माल लेकर कई दशकों से हम राखी का कारोबार करते आ रहे हैं. इस बार चीनी माल नहीं मिलने से परंपरागत राखियों का निर्माण करना पड़ा. कोरोना का सीधा असर राखी के कारोबार पर पड़ा है. चुनौतियों के साथ इस बात की संतुष्टि है की देश प्रेम में थोड़ा त्याग कर सका. -नरेंद्र पटवा, कालबादेवी