Mumbai Kirti Nagar Open defecation

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रितेश तिवारी@नवभारत 
मुंबई:
देशभर में सरकार शहर से लेकर गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने के दावा करती है, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आज भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां सार्वजनिक शौचालय ना होने के कारण जनता खुले में शौच करने को मजबूर है। मुंबई की ये घटना ना सिर्फ स्वच्छता अभियान की पोल खोल रही है बल्कि सरकार के दावे को भी झूठ साबित कर रही है। मुंबई के कीर्ति नगर का इलाका भी उन्हीं में से एक है। 900 लोगो की आबादी वाले इस इलाके में सार्वजनिक शौचालय नहीं है।  

इलाके में नहीं है शौचालय 
गोरेगांव पूर्व आरे कॉलोनी में स्थित कीर्ति नगर में करीब 250 से ज्यादा झुग्गी है, ये झुग्गियां लगभग 15 वर्षों से कीर्ति नगर में बसी हुई हैं। यहां की जनसंख्या का आकलन करें तो करीब 900 से ज्यादा लोग रहते हैं। ऐसे में इस इलाके में निवासियों के लिए अभी तक सार्वजनिक शौचालय ना होने के कारण यहां की जनता खुले में शौच करने को मजबूर है। स्थानीय लोगो की इस समस्या पर इनकी गुहार सुनने वाला कोई नहीं है। 

खुले में शौच की वजह से होती है बीमारी 
स्थानीय जनता के अनुसार कीर्ति नगर में शौचालय ना होने के कारण लोगों को दूर दूसरे क्षेत्रों में जाना पड़ता है, या तो पास के जंगलों में खुले में शौच करना पड़ता है जिसके चलते लोग अक्सर बीमार पड़ते हैं। खासकर महिलाओं और बच्चों में खुले में शौच करने को लेकर भय बना रहता है। लोग बताते हैं कि चुनाव आते ही नेता हमारे विकास व सुविधा की बात करते हैं।  लेकिन चुनाव बीतते ही सभी वादों, को भूल जाते हैं। जब भी हमारे सुविधा की बात आती है वन विभाग रोड़ा बन जाता है। ऐसे में हम जाएं तो जाएं कहां ? 

Open defecation in Mumbai

इसलिए नहीं बन पाया शौचालय 
पूर्व नगरसेविका, उज्ज्वला मोदक का कहना है कि कीर्ति नगर आरे कॉलोनी इको सेंसेटिव वन क्षेत्र के अन्तर्गत आता है, आरे इस इलाके में करीब 4 बार अतिक्रमण हटाने का काम कर चुकी है, ऐसे में वैध रूप से बिना आरे प्रशासन के अनुमति के यहां विकास काम नहीं किया जा सकता मैं प्रयासरत हूं, कि यहां की जनता को शौचालय मिले। 

खुले में शौच जाने पर आती है शर्म 
अंजली विष्णु परमार (स्थानीय महिला) शौचालय ना होने के कारण महिलाओं को मजबूरन खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है, जो बेहद शर्मनाक है। हम भी इसी देश की महिलाएं हैं, हमें भी अच्छा जीवन जीने का अधिकार है। मेरी सरकार से मांग है, हमारे समस्याओं को गंभीरता से ले। 

शौचालय बनाने की मांग 
लाला लल्लू सिंह (स्थानीय नागरिक) ने नवभारत को बताया कि मैं इस कीर्ति नगर में पिछले 23 वर्षों रह रहा हूं, लेकिन आज भी हम लोग शौचालय, बिजली जैसी  सुविधाओं से वंचित है। हमें सरकार ने मतदान करने का अधिकार तो दिया है, लेकिन हमे आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है। मेरी प्रशासन से मांग है कि जल्द से जल्द हमारे इलाके में शौचालय बनाई जाए। 

शौच को जाना बहुत ही खतरनाक
रानी डब्लू सिंह (स्थानीय महिला) ने बताया, हमें पता है खुले में शौच को जाना बहुत ही खतरनाक है। बरसात में जीव-जंतु, जमीन पर रेंगने वाले जानवरों का खतरा बना रहता है। सरकार ने गावों में इज्जत के लिए घर-घर शौचालय बनवाया है। लेकिन हम मुंबई में रहने के बावजूद अब भी इज्जत घर से कोसों दूर है।