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  • आयोग पर सरकार के दखल का आरोप 
  • स्वायत्तता को लेकर उठे सवाल
  • तेजी से इस्तीफ़ा दे रहे सदस्य 
नवभारत न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई: राज्य में मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) को लेकर ओबीसी (OBC) बनाम मराठा की लड़ाई चल रही है। इसी बीच पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC Commission) और राज्य सरकार (Government) के बीच खींचतान देखने को मिल रही है। बताया गया है कि ओबीसी आयोग के कामकाज में सरकार के हस्तक्षेप (Interference) से सदस्य नाराज हो गए हैं। इसके चलते एक सदस्य ने पिछले दिनों इस्तीफा (Resignation) दे दिया है, जबकि दूसरे मेंबर भी जल्द ही स्वायत्तता के मुद्दे को लेकर आयोग से बाहर हो सकते हैं। 

मंत्री भुजबल ने भी की थी,आलोचना  
राज्य में मराठा आरक्षण को लेकर घमासान जारी है। मराठा समाज को सीधे कुनबी प्रमाणपत्र जारी किए जाने को लेकर मनोज जरांगे पाटिल और छगन भुजबल के बीच विवाद खड़ा हो गया है। छगन भुजबल और अन्य ओबीसी नेता मराठा समुदाय को ओबीसी कोटे में से आरक्षण देने के खिलाफ हैं। इस मामले में सरकार में कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल ने स्वयं ओबीसी आयोग को ही कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग मराठा आयोग हो गया है। आरक्षण को लेकर गठित पिछड़ा वर्ग आयोग की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठ रहे हैं। 
 
सीएम के पत्र पर नाराजगी 
चर्चा है, कि सरकार और आयोग के सदस्यों के बीच मतभेद पैदा हो गये हैं। आरोप लगा है कि राज्य सरकार ओबीसी आयोग के कामकाज में दखल दे रही है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा लिखे गये पत्र पर कुछ सदस्यों ने नाराजगी जताई है। 13 नवंबर को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश आनंद निरगुडे को पत्र लिखा था। इसमें मराठा समुदाय को पिछड़ा वर्ग या ओबीसी में शामिल करने का जिक्र था। उनके पत्र में 10 सूत्री मुद्दों अथार्थ टर्म्स ऑफ रेफरेंस में सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक पिछड़ेपन की जांच के लिए मानदंड और पैरामीटर तय करने को कहा गया। पिछली 1 दिसंबर को हुई बैठक में कुछ सदस्यों ने केवल मराठा समाज का डेटा एकत्र करने से असहमति जताते हुए सभी समुदायों से डेटा संग्रह का आह्वान किया। 

एक और सदस्य के इस्तीफे की चर्चा
मराठा समुदाय के सर्वे के मुद्दे पर पिछड़ा वर्ग आयोग में पहले से ही मतभेद सामने आने लगे हैं। आयोग के कामकाज में बढ़ते हस्तक्षेप, जाति-मुक्त सर्वेक्षण में बाधा समेत अन्य कारणों से आयोग के सदस्य इस्तीफा दे रहे हैं। इससे पहले आयोग के सदस्य सोनवणे और एड. बालाजी किल्लारीकर ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद लक्ष्मण हाके ने भी इस्तीफा दे दिया। अब खबर है, कि एक और सदस्य इस्तीफा देने की तैयारी में है।