नांदेड़ के बाद संभाजीनगर में 8 मरीजों की मौत, राज्य सरकार पर मुकदमे की मांग

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  • सरकार प्रचार पर कर रही करोड़ों का खर्चा दवाई के अभाव में अस्पताल में दम तोड़ रहे मरीज: राहुल गांधी
  • सरकार के खिलाफ 302 का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए: नाना पटोले
  • सरकारी अस्पताल मौत का अस्पताल बन गए हैं  
मुंबई/नांदेड़: नांदेड़ (Nanded) के सरकारी अस्पताल में 48 घंटे में 16 नवजात शिशुओं सहित 31 मरीजों की मौत से राज्य की सियासत गरमा गई है। राकां अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा कि नांदेड़ में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना को अभी एक दिन भी नहीं हुआ है। संभाजी नगर (Sambhajinagar) के एक अस्पताल में 2 नवजात शिशुओं सहित 8 मरीजों की मौत की घटना ने सरकारी स्वास्थ्य पर कालिख पोत दी है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि नांदेड़ की घटना के बाद भी प्रशासन नहीं जागा है। मैं मृतकों के परिवारों के दुख में शामिल हूं और अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं।
 
राज्य सरकार के खिलाफ दर्ज हो 302 का मुक़दमा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने भड़कते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में हो रही मौत के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है। ऐसे में इस सरकार के खिलाफ 302 का मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा नीत सरकार की उदासीनता के कारण राज्य के सरकारी अस्पताल मौत का अस्पताल बन गए हैं। पटोले ने आरोप लगाया कि 40 फीसदी कमीशन की वजह से दवाओं को नहीं ख़रीदा गया। उन्होंने इस लापरवाही के लिए राज्य के स्वास्थ्य व  चिकित्सा शिक्षा मंत्री को बर्खास्त किए जाने की मांग की है।
 

जिम्मेदारी निश्चित हो
पूर्व सीएम और नांदेड़ के स्थानीय कांग्रेसी नेता अशोक चव्हाण ने कहा कि यहां के सरकारी अस्पताल में मौत का सिलसिला नहीं रुक रहा है। मंगलवार को भी 7 मरीजों की मौत हो गई।  जिसमें 4 बच्चे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन मौतों के लिए जिम्मेदार कौन है। यह राज्य सरकार को निश्चित करना होगा।

बीजेपी के लिए गरीबों की जान की कीमत नहीं
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि महाराष्ट्र के सरकारी अस्पताल में दवाइयों की कमी से 12 नवजात शिशुओं समेत 24 लोगों की मृत्यु का समाचार  बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा की अगुवाई में बनी सरकार हजारों करोड़ रुपए अपने प्रचार पर खर्च कर रही है। लेकिन अस्पतालों में दवाइयों को खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। भाजपा की नजर में गरीबों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं है।