Murder
प्रतीकात्मक तस्वीर

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नागपुर. सबूतों के अभाव में आरोप सिद्ध नहीं होने के कारण अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश एस.एम. कनकदंदे ने हत्या के मामले में 3 आरोपियों को बरी कर दिया. आरोपियों में वरंभा अंबाडी, कामठी निवासी रामकृष्ण सुदाम मेश्राम (36), शुभम नामदेव भगत (23) और हर्षल देवराव मेश्राम (20) का समावेश है. तीनों पर परिसर में रहने वाले धीरज उर्फ भोला भगवानदास सालवे (30) की हत्या का आरोप था. 1 जून, 2020 की सुबह लकड़गंज पुलिस को इतवारी स्टेशन के माल धक्का परिसर में लाश पड़ी होने की जानकारी मिली थी.

पुलिस ने पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था. गला घोंटे जाने और चेहरे पर जख्मों के निशान थे. इसीलिए पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच आरंभ की. बाद में मृतक की शिनाख्त धीरज के रूप में हुई. महिला से संबंध होने के संदेह में धीरज का कुछ दिन पहले इन आरोपियों के साथ विवाद हुआ था. इसीलिए पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और आरोपियों ने हत्या और सबूत नष्ट करने की कबूली दी. जांच अधिकारी सुनील राऊउत ने आरोपपत्र दायर किया.

अभियोजन पक्ष द्वारा धीरज की पत्नी सहित 13 गवाहों के बयान दर्ज करवाए गए लेकिन पूरा मामला परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित था. अभियोजन पक्ष धीरज की हत्या में आरोपियों की सहभागिता और लास्ट सीन थिअरी साबित नहीं कर पाया. मृतक धीरज का दुपट्टा और मोबाइल भी पुलिस के हाथ नहीं लगा. आरोप सिद्ध नहीं होने के कारण न्यायालय ने तीनों को बरी कर दिया. बचाव पक्ष की पैरवी अधिवक्ता रविंद्र आर. राजकारणे, एम.ए. खोब्रागड़े और चेतन ठाकुर ने की.