Representational Pic
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    • 168 रुपये कर दिया सरकार ने शुल्क
    • 3 गुना बढ़ाने का तीव्र निषेध

    नागपुर. राज्य सरकार के नगर विकास विभाग द्वारा 18 अक्टूबर को गुंठेवारी के तहत प्लॉट नियमितीकरण शुल्क 56 रुपये प्रति वर्गफुट से तीन गुना बढ़ाकर 168 रुपये कर दिया है. इसे जनता पर अन्याय बताते हुए भाजपा अध्यक्ष प्रवीण दटके के नेतृत्व में भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं ने एनआईटी का घेराव किया. एनआईटी चेयरमैन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की गई कि तत्काल यह अन्यायकारक जीआर रद्द कर शुल्क को वापस 56 रुपये किया जाए अन्यथा जनता को साथ लेकर यह आंदोलन जारी रहेगा.

    सैकड़ों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एनआईटी पहुंचे. दोपहर 3 बजे के करीब एनआईटी परिसर के सामने जुटे कार्यकर्ताओं ने मविआ सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. इस दौरान एनआईटी के सामने ट्रैफिक  जाम हो गया. विधायकों का शिष्टमंडल चेयरमैन से भेंट कर नियमितीकरण शुल्क वृद्धि को वापस लेने की मांग की.

    इस दौरान मेयर दयाशंकर तिवारी, विधायक कृष्णा खोपड़े, विकास कुंभारे, मोहन मते, मिलिंद माने, संजय बंगाले, रमेश चोपड़े, बाल्या बोरकर, अवनाश ठाकरे, प्रकाश भोयर, विक्की कुकरेजा सहित सभी नगरसेवक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए. 

    5 लाख लोग होंगे प्रभावित

    दटके ने कहा कि इस अत्याचारी सरकार के इस कदम से अकेले नागपुर शहर में ही 5 लाख नागरिकों को फटका बैठेगा. शहर से सटे इलाकों में अपने खून-पसीने की कमाई से 50 से 100 रुपये वर्ग फुट की जमीन खरीदने वाले गरीब और मध्यम वर्ग परिवार पर आघाड़ी सरकार ने तीन गुना नियमितीकरण शुल्क लादने का पाप किया है. यह जनता सहन नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि जल्द ही सरकार अपना जीआर रद्द करे अन्यथा 22 नवंबर को एनआईटी के चारों जोनल कार्यालयों में जनता को साथ लेकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. 

    भाजपा ने बर्खास्त की था नासुप्र

    दटके ने कहा कि गुंठेवारी कानून 2020 अमल में लाने के बाद गुंठेवारी क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री देवन्द्र फडणवीस के नेतृत्व में बीते 5 वर्ष में भरपूर विकास कार्य हुए. सभी अनधिकृत लेआउट में अमृत योजना के अंतर्गत नलों की पाइप लाइन भी डाली गई. 2001 गुंठेवारी कानून के अंतर्गत जो लेआउट मंजूर हैं और जो मंजूरी के लिए पेश हुए हैं उन मंजूर लेआउट में एनआईटी ने डिमांड नहीं दिया.

    ऐसे 2001 के पहले के लेआउट शुल्क में तीन गुना बढ़ोतरी करने का सरकार ने निर्णय लिया. उन्होंने कहा कि बीते 2 वर्ष कोविड काल में नागरिक हलाकान हो चुके हैं. उनके काम-धंधे, नौकरी प्रभावित होने से आर्थिक स्थिति विषम है. ऐसे में मविआ सरकार ने नियमितीकरण शुल्क को तीन गुना कर अन्याय किया है.