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  • खोखले निकले टर्मिनस-सैटेलाइट स्टेशन बनाने के दावे, लोग करे और कितना इंतजार

नागपुर. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के पर्याय स्टेशन के तौर पर 10 किमी दूर हबीबगंज स्टेशन (अब रानी कमलापति स्टेशन) को विकसित किया गया. प्राइवेट कम्पनी को लीज आधारित करार के जरिये करीब 400 करोड़ की लागत से इसे देश का पहला आईएसओ प्राप्त स्टेशन बना दिया गया. मध्य भारत में एक स्टेशन और है जिसका नाम अजनी है. नागपुर स्टेशन पर ट्रेनों और यात्रियों की बढ़ती संख्या के आधार पर इसे भी पर्याय कहा गया. आए दिन मंत्री, सांसद अजनी को कभी टर्मिनस तो कभी सैटेलाइट स्टेशन बनाने के वादे करते रहे. लेकिन विकास के मामले में अजनी अब हबीबगंज से पिछड़ चुका है. हबीबगंज स्टेशन पूरी तरह से नया रूप लेकर यात्रियों के लिए उपलब्ध भी हो चुका है. दूसरी तरफ, अजनी स्टेशन अब भी आम सुविधाओं को तरस रहा है.

सिर्फ 3 प्लेटफार्म, ट्रेनें भी घटाईं

लॉकडाउन से पहले नागपुर स्टेशन पर हर दिन करीब 150 से अधिक ट्रेनों का परिचालन होता था. वहीं हर दिन 30,000 से ज्यादा यात्रियों की आवाजाही थी. ट्रेनों और यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही थी, साथ ही नागपुर स्टेशन पर भीड़ का दबाव. ऐसे में 3 किमी दूर अजनी स्टेशन को इसका पर्याय माना गया. धीरे-धीरे अधिक ट्रेनों के स्टापेज बढ़ा दिए गए लेकिन यहां प्लेटफार्म की संख्या 3 से अधिक नहीं हो सकी. हालांकि 2 और प्लेटफार्म बनाने की योजना तैयार है लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं किया गया. दूसरी तरफ, कोविड काल के दौरान अजनी स्टेशन पर गिनी-चुनी ट्रेनों को ही स्टापेज दिया जा रहा है. ऐसे में जहां सुविधाएं बढ़नी चाहिए थी, वहां घटाई जा रही हैं.

जगह की कमी नहीं, मंशा का सवाल

हैरान करने वाली बात है कि अजनी स्टेशन के विकास के लिए रेलवे के पास जमीन की कोई कमी नहीं है. हर बजट में अजनी स्टेशन का नाम आता है. हर बार टर्मिनस बनाने की घोषणा की जाती है और कागजों पर हल्की-फुल्की निधि भी प्रस्तावित कर दी जाती है. यह बात और है कि ये बात कभी प्रस्ताव से आगे नहीं बढ़ी. अधिकांश रेल मंत्रियों ने अजनी के स्टेशन के विकास की बात कही, इसे विकसित करने की तैयारी जताई लेकिन आज तक बात कागज से बाहर नहीं आ सकी. साफ है कि यदि जगह की कमी नहीं है तो सवाल सीधे मंशा पर उठता है. यदि उनकी मंशा होती तो अभी तक अजनी स्टेशन को हबीबगंज से पहले विकसित करके यात्रियों को सौंप दिया जाता. 

राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी

सारा ठीकरा रेलवे पर नहीं फोड़ा जा सकता. शहर के विकास और नागरिकों को अधिक से अधिक बेहतर सुविधायें देने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति बहुत जरूरी है. अजनी स्टेशन को टर्मिनस बनाए जाने के दावे करके स्थानीय कई नेताओं ने अपनी राजनीति चमकाई, केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय को पत्र लिखे, दिल्ली जाकर रेल मंत्रियों को ज्ञापन सौंपा लेकिन कोई भी ठोस प्रयास नहीं कर सके. परिणाम के तौर पर अब भी विकास की बाट जोहता अजनी स्टेशन सामने है.