anil deshmukh

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    नागपुर. पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के विभिन्न ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अब तक 6 बार कार्रवाई कर चुकी है. इसके बाद 1 बार सीबीआई ने दबिश दी. सभी को लगा था कि देशमुख से संबंधित सारे कागजात जब्त हो गए होंगे और ईडी जांच में अब तक काफी आगे पहुंच चुकी होगी लेकिन अचानक आयकर विभाग की भी एंट्री हो जाती है.

    आयकर विभाग ठीक उन्हीं जगहों पर पहुंचता है जहां-जहां ईडी ने दस्तक दी थी. वहीं देशमुख का आवास, कार्यालय, चार्टर्ड अकाउंटेंट और व्यापारिक सहयोगी. आईटी विभाग द्वारा शुक्रवार को की गई कार्रवाई में पूरे राज्य से लगभग 200 अधिकारियों और कर्मचारियों को बुलाया गया और कार्रवाई की गई. शाम तक पता चला कि देशमुख के सारे ठिकानों पर तो कार्रवाई हुई थी चार्टर्ड अकाउंटेंट किशोर देवानी और सुधीर बाहेती के यहां पर भी देर रात तक कार्रवाई चलती रही.

    एक-एक स्थान पर आयकर विभाग के 15 से 20 लोगों को लगाया गया. बाहेती के घर के बाहर भी दिनभर और देर रात तक लगभग 4 गाड़ियां लगी रहीं. बेरामजी टाउन स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंटों के यहां पर भी 4 से 5 वाहन लगे रहे. इसी प्रकार अजनी स्थित पंजवानी के यहां पर भी कार्रवाई हुई है. इससे यही लग रहा हैं कि ईडी के बाद कागजात खंगालने का काम आयकर विभाग भी कर रहा है. हालांकि जानकार बता रहे हैं कि आयकर कार्रवाई में विभाग को कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है क्योंकि कागजात पहले ही अन्य विभाग के अधिकारी अपने साथ ले गए हैं. इसलिए अब इनके पास दिखाने के लिए भी कुछ बचा ही नहीं है. 

    क्या ईडी से चूक हुई

    आर्थिक क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि क्या ईडी से कार्रवाई में चूक हो गई थी कि आयकर विभाग को भी सामने आना पड़ा क्योंकि दोनों विभाग लगभग एक जैसे ही मामलों में डील करते हैं. गलत आय होगी तब ही आर्थिक फ्रॉड होगा. अगर ईडी सारे कागजात ले जा चुकी थी तो फिर उसने ही आयकर विभाग को कागजात क्यों नहीं सौंपे. आयकर विभाग के अधिकारियों को आखिरकार सीआरपीएफ जवानों के आगोश में रहकर कार्रवाई क्यों करनी पड़ी. दोनों विभागों के बीच तालमेल का अभाव था या फिर केवल कार्रवाई दिखानी थी. 

    CRPF के होने से खफा आर्थिक जानकार

    आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि आयकर दाता भले ही कमाई छुपा सकते हैं लेकिन वे चोर, डकैत, मव्वाली या बड़े क्रिमिनल नहीं है जिसके लिए सीआरपीएफ जवानों की जरूरत पड़े. देशमुख का मामला भले ही हाई प्रोफाइल हों लेकिन उनके यहां पर सीआरपीएफ जवानों को लाने से पूरे शहर के करदाताओं में दशहत फैला है. अगर किसी करदाता के घर के सामने इस प्रकार से जवान खड़े कर दिए जाएं तो यह गलत बात है. चार्टर्ड अकाउंटेंटों के आवास के सामने भी जवान खड़े थे जो किसी भी हालत में नहीं होने चाहिए थे. विभाग के साथ-साथ सरकार को भी इस पर एक बार गंभीरता से विचार करने की जरूरत है. सीआरपीएफ जवान का उपयोग कर चोरी खोजने के लिए किया जाना न्यायोचित नहीं है. इससे करदाताओं में गलत संदेश ही गया है.