बीच सड़क पर खड़ी हो जाती हैं बसें, वाहन चालकों और यात्रियों की बढ़ जाती है परेशानी

    नागपुर. शहर के अनेक हिस्सों में बस स्टाप नहीं होने से 3-4 बसें एक साथ बीच सड़क पर यात्रियों को उतारने के लिए खड़ी हो जाती हैं. इसके चलते जहां वाहनचालकों और यात्रियों की परेशानी बढ़ जाती हैं, वहीं बस की प्रतीक्षा भी यात्रियों को सड़कों पर ही खड़े रहकर करनी पड़ती हैं. इस हालत में दुर्घटना की संभावना बनी रहती है. साथ ही यातायात भी बाधित होता है.

    वर्धा रोड पर हमेशा भारी वाहनों की भीड़ लगी रहती है. छत्रपति चौक से वर्धा की ओर जाते समय सड़क किनारे बसों का जमावड़ा लगा रहता है. हालांकि एक बस स्टाप बनाया गया है, लेकिन यहां भी हमेशा साफ-सफाई नहीं होती. इस स्टाप पर एसटी बसों के साथ ही निजी ट्रैवल्स बसों का भी दिन भर जमावड़ा लगा रहता है. 

    आए दिन होती हैं दुर्घटनाएं

    यही स्थिति छत्रपति चौक की ओर से आते हुए भी बनी रहती है. स्नेहनगर की ओर जाने वाले कार्नर पर खड़े होकर ही बस का इंतजार करना पड़ता है. लक्ष्मीनारायण हाल के पास बस स्टाप बना है, लेकिन वहां कभी बसें रुकती नहीं हैं. चाहे एसटी हो या ट्रैवल्स की बसें, सभी स्नेहनगर के कार्नर पर होटल के सामने आकर रुकती हैं. यहां एक के बाद एक 3-4 बसें आकर रुकती हैं. इसके कारण बसें आधी सड़क को ही घेर लेती हैं.

    इससे जहां पैदल चलने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, वहीं दुपहिया और चारपहिया वाहनों को भी बड़ा संभलकर निकलना पड़ता है. यहां यातायात जाम होने से आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं भी होती हैं. वहीं यहां पर बसों के साथ आटो और रिक्शाचालकों का भी जमावड़ा मचा रहता है. पैदल चलने वाले मुश्किल में पड़ जाते हैं, चलें तो कहां से चलें. यह स्थिति सुबह से रात्रि तक यथावत बनी रहती है. इस पर किसी ने अब तक लगाम लगाने की कोशिश नहीं की. 

    ठेले वालों का रहता है कब्जा

    मनपा द्वारा शहर में बहुत से स्थानों पर शेड वाले बस स्टाप जरूर बनाये गये हैं, लेकिन इसके सामने हमेशा ठेले वालों का कब्जा रहता है. इन ठेले वालों के कारण बस स्टाप का अस्तित्व ही नजर नहीं आता. इंदोरा चौक की स्थिति तो बद से बदतर हो चुकी है. चौक के किनारे ही यात्रियों को बस के इंतजार में सड़क पर खड़े रहना पड़ता है. यहां पर बस स्टाप की अत्यंत आवश्यकता है. वहीं शांतिनगर चौक पर भी आटो चालकों का कब्जा हमेशा बना रहता है. बस स्टाप के लिए शेड नहीं होने से यात्रियों को फुटपाथ पर खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ता है. शहर के सक्करदरा, महल, गांधीबाग, अयोध्यानगर, छोटा ताजबाग आदि इलाकों में इस तरह की स्थिति बनी हुई है. 

    नहीं की जाती आटोचालकों पर कार्रवाई

    हमेशा यातायात पुलिस तैनात रहने वाले तुकड़ोजी पुतला चौक की स्थिति तो और ही ज्यादा खतरनाक है. यहां चौक के किनारे पर ही आटो स्टैंड बन गया है.  पुलिस बूथ के थोड़ा सा आगे बढ़ने पर यात्री स्टार बसों का इंतजार सड़कों पर ही करते नजर आते हैं. आटो के जमावड़े के साथ-साथ यहां बीच सड़क पर रुकने वाली स्टार बसों के कारण यातायात हमेशा जाम रहता है. इसके चलते चौक पर वाहनों की लंबी-लंबी लाइनें लग जाती हैं. 

    म्हालगीनगर बस स्टाप पर ठेले वालों का कब्जा

    हुड़केश्वर रोड पर दिनभर में स्टार बसों की अनेक फेरियां होती हैं. हिंगना रोड के बाद इस मार्ग पर सबसे अधिक बसें चलती हैं. इतनी बसें चलने के बावजूद म्हालगीनगर चौक के पास मात्र एक बस स्टाप बनाया गया है. इस पर भी ठेले वालों का कब्जा रहता है. इनके कारण बसों को खड़ी होने के लिए जगह भी नहीं रहती. मजबूरन बसों को बीच सड़क पर ही खड़े होना पड़ता है. इसके चलते यहां सुबह और शाम को जबरदस्त ट्राफिक जाम रहता है. वहीं सब्जी वाले भी आधी सड़कों को घेर लेते हैं.

    बस का चक्का सब्जी की दूकान से लगकर रुकता है. ऐसे में किसी दिन बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता. त्योहारों के दिन यहां की स्थिति और भी अधिक खराब हो जाती है. सामान बेचने वाले डिवाइडर को घेरने के साथ इसके अगल-बगल भी अपने सामान रख देते हैं. इसके कारण सड़क इतनी चौड़ी होने के बावजूद भी छोटी सी नजर आती है. एक चारपहिया वाहन निकलने लायक सड़क बचती है.