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    नागपुर. शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल में डॉक्टरों व मरीजों के परिजनों के बीच होने वाली विवाद की घटनाओं के बाद प्रशासन ने महाराष्ट्र सुरक्षा बल के जवान तैनात किए. जवानों को मेडिकल में सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है लेकिन इन दिनों कुछ जवान मरीजों व परिजनों को डांट-फटकार करने में लगे हुए हैं. वार्डों के सामने बैठे परिजनों से अच्छा बर्ताव नहीं किया जा रहा है.

    मेडिकल में डॉक्टरों, नर्सों और मरीजों की सुरक्षा के लिए महाराष्ट्र सुरक्षा बल के जवान तैनात किए गए हैं. इनका मूल कार्य चौबीसों घंटे गश्त लगाना और वार्डों, ओपीडी में मरीज-परिजन व डॉक्टरों के बीच समन्वय पर ध्यान देना है लेकिन इन दिनों कुछ जवान अलग ही तरह की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. मेडिकल के प्रवेश द्वार पर जवानों को तैनात किया गया है ताकि कोई बाहरी असामाजिक तत्व भीतर प्रवेश न करे. कैजुअल्टी के सामने भी जवान बैठे रहते हैं. वहीं कुछ जवानों की ड्यूटी वार्डों के बाहर लगाई गई है. वार्ड के बाहर दिनभर कुर्सी पर बैठे कुछ जवान सुरक्षा की बजाय मरीजों व उनके परिजनों को डांट-फटकार लगाने में व्यवस्त रहते हैं. 

    महिलाकर्मी से हुई बहस 

    सरकार द्वारा इन जवानों पर हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन उनका उपयोग अलग ही कार्य के लिए हो रहा है. हालांकि कुछ जवान मरीजों सहित परिजनों की मदद भी करते हैं लेकिन कुछ यह भूल गये हैं कि उनका मूल कार्य क्या है. वहीं दूसरी ओर वार्डों के सामने कुछ प्राइवेट पैथालॉजी के एजेंट सैंपल कलेक्शन के लिए घुमते रहते हैं, लेकिन इन जवानों को यह एजेंट दिखाई नहीं देते. एजेंट वार्डों के भीतर जाकर मरीजों को रिपोर्ट भी थमा देते हैं. जब सुरक्षा जवानों की सख्त मुस्तैदी है तो फिर प्राइवेट पैथालॉजी के एजेंट कैसे भीतर प्रवेश कर रहे है, यह सवाल उठने लगा है. या फिर यह भी हो सकता है कि एजेंट के साथ सुरक्षा रक्षकों की साठगांठ हो.  

    किसने दिया अधिकार 

    मरीजों के परिजनों का कहना है कि वार्डों के सामने खड़े रहने पर कुछ महिला रक्षकों द्वारा अपशब्द भी बोले जाते हैं. इस तरह की घटना हर दिन होती है. दरअसल मेडिकल में जरूरतमंद और निर्धन लोग आते हैं लेकिन इन सुरक्षाकर्मियों का रवैया और संवाद असहनीय होता है. वार्ड के बाहर बरामदे में बैठने की जगह नहीं है. वहीं पहले माले पर बना प्रतीक्षालय भी बंद है. इस हालत में परिजन कहां बैठें? यह सवाल खड़ा हो गया है. इन जवानों को मेडिकल में सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है लेकिन सुरक्षा को छोड़कर यह फटकार लगाने का काम कर रहे हैं. इनके बर्ताव से न केवल परिजन बल्कि मेडिकल की नर्सें भी परेशान हैं. परिजनों का कहना है आखिर इन्हें फटकार लगाने का अधिकार दिया किसने है.