Nagpur High Court

    नागपुर. कोरोना महामारी का विकराल संकट तथा इस संदर्भ में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों के बीच पीड़ितों की दुर्दशा को लेकर लगातार छप रही खबरों पर हाई कोर्ट की ओर से स्वयं संज्ञान लिया गया. अलग-अलग स्तर पर याचिकाएं भी दायर की गईं. इन सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर अदालत द्वारा समय-समय पर आदेश जारी किए गए. इन्हीं आदेशों के अनुसार एम्स में सेवाएं देने के लिए अस्थायी तौर पर डॉक्टरों की नियुक्ति की गई. अब इन डॉक्टरों को तुरंत छोड़ने के आदेश न्यायाधीश सुनील शुक्रे और न्यायाधीश अनिल किल्लोर ने एम्स को जारी किए. अदालत मित्र के रूप में अधि. श्रीरंग भांडारकर, इंटरविनर की ओर से अधि. अनिलकुमार मुलचंदानी, मनपा की ओर से अधि. सुधीर पुराणिक और राज्य सरकार की ओर से मुख्य सरकारी वकील केतकी जोशी ने पैरवी की. 

    डॉक्टरों को 15 दिनों में भुगतान

    सुनवाई के दौरान इंटरविनर की ओर से पैरवी कर रहे अधि. मूलचंदानी ने कहा कि एम्स में नियुक्त इन डॉक्टरों को अबतक भुगतान नहीं किए जाने की जानकारी डॉक्टरों द्वारा ही उजागर की जा रही है. इस पर अदालत ने डॉक्टरों को भुगतान किया गया या नहीं, इस संदर्भ में छानबीन करने के बाद यदि भुगतान नहीं किया गया हो तो 15 दिनों के भीतर भुगतान करने के आदेश अदालत ने दिए. हाई कोर्ट की ओर से आदेश जारी हो ही रहे थे कि जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से विधि अधिकारी भूते ने अदालत के समक्ष कुछ प्रेषित करने का प्रयास किया तो अदालत ने आदेश को बीच में ही रोक दिया. विधि अधिकारी ने अदालत को बताया कि प्रत्येक डॉक्टर को भुगतान किया जा चुका है. 

    विधि अधिकारी को लगाई फटकार

    सुनवाई के दौरान विधि अधिकारी द्वारा दी जा रही जानकारी अदालत द्वारा सुन ली गई किंतु इस तरह से आदेश देते समय अचानक दलील रखे जाने को लेकर आपत्ति जताई. नाराजगी जताते हुए अदालत ने आदेश में कहा कि विधि अधिकारी को कोर्ट के अनुशासन और शिष्टाचार का पालन करना चाहिए किंतु ऐसा लगता है कि विधि अधिकारी इससे परिचित नहीं है. अन्यथा इस तरह से निरंतर दलील जारी नहीं रखी जाती. अदालत ने आदेश में कहा कि विधि अधिकारी द्वारा अदालत से माफी मांगी गई जिसे स्वीकृत किया गया. फिलहाल भविष्य में सतर्क रहना चाहिए. गत सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार की ओर से एम्स में 40 डॉक्टरों को भेजा गया है. कोर्ट के आदेशों के बाद डॉक्टरों को तो भेजा गया लेकिन राज्य सरकार की ओर से उनका वेतन अदा नहीं किया गया है. इस पर अदालत ने इस संदर्भ में जानकारी लेने के आदेश सरकारी वकील को दिए थे.