Yavatmal Basti
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  • लीज पर पट्टे वितरण का सर्वे भी रह गया अधूरा
  • 03 एजेंसियों की हुई थी नियुक्ति

नागपुर. लोकसभा और विधानसभा के चुनाव आते ही आश्वासन और घोषणाओं की बाढ़ आना भले ही कोई नई बात ना हो, लेकिन घोषणाओं के अनुसार नियम तय कर कुछ हद तक लोगों से टैक्स जमा कर खर्च की गई निधि के बाद अचानक योजना बंद होना आश्चर्य से कम नहीं है. चूंकि अब एक वर्ष बाद मनपा के भी आम चुनाव होने जा रहे है. अत: निकट भविष्य में इस तरह की घोषणाओं का दौर शुरू हो जाएगा.

उल्लेखनीय है कि मनपा क्षेत्र में विभिन्न विभागों की जमीन पर हुए अतिक्रमण और लंबे समय से इन्हें नियमानुकूल करने की प्रक्रिया भले ही अब तक ठप रही हो, लेकिन अब विधानसभा के आम चुनावों को देखते हुए इसे गति देने का काम किया जा रहा था. यहां तक कि मनपा की ओर से न केवल स्वतंत्र सेल का निर्माण किया गया, बल्कि सर्वे कराने के लिए 3 एजेंसियों की नियुक्ति भी की गई. किंतु चुनाव खत्म होने के बाद योजना भी बंद हो गई. जबकि लीज पर पट्टे वितरण का सर्वे भी अधूरा छोड़ दिया गया.

झोपड़पट्टी धारकों का आर्थिक सर्वेक्षण

मनपा की ओर से जानकारी उजागर करते हुए बताया गया था कि सभी को घर देने की सरकार की योजना और इस संदर्भ में लिए गए फैसले के अनुसार अतिक्रमणधारकों को लीज पर पट्टे देने का काम शुरू किया गया है. जिसके लिए झोपड़पट्टी धारकों के सामाजिक और आर्थिक सर्वेक्षण किया जा रहा है. लीज पर पट्टे देने के संदर्भ में वर्ष 2011 के पूर्व के सभी झोपड़पट्टी धारकों के लिए राज्य सरकार की ओर से 17 नवंबर 2018 को अधिसूचना जारी की गई थी. इसी फैसले के अधीन स्वतंत्र सरकारी निर्णय भी लिया गया. प्रन्यास की जमीन पर के अतिक्रमित झोपड़पट्टी धारकों को पट्टे देने, स्थानीय स्वराज्य संस्था क्षेत्र के अंतर्गत के सभी सरकारी विभागों (वन विभाग छोड़कर) की जमीन पर के अतिक्रमण को नियमानुकूल कर लीज पर पट्टे देने के साथ ही मनपा की जमीन पर की झोपड़पट्टी  धारकों और एनएमआरडीए की जमीन के अतिक्रमणधारकों को भी लीज देने का निर्णय लिया गया है. 

11 हजार परिवारों का हुआ था सर्वे

बताया जाता है कि तीनों एजेंसियों  की ओर से 11 हजार परिवारों का सर्वे किया गया. मनपा के मालकी की जमीन पर की 13 झोपड़पट्टी  में 3,874 परिवारों की जानकारी जमा की गई. जिसमें से 1,260 परिवारों द्वारा दस्तावेज जमा कराए गए. इसमें से 378 परिवारों को लीज पर पट्टों का वितरण किया जा चुका है. जबकि 227 परिवारों को डिमांड का वितरण किया गया. जगह-जगह लगाए गए शिविरों के माध्यम से 651 परिवारों सम्पत्ति कर अदा करने लीज पर पट्टे प्राप्त करने की अपील भी की गई. इसके अलावा नजूल की जमीन की झोपड़पट्टियों में 7,861 घरों का सर्वे किया गया. जिसमें से 2,392 परिवारों द्वारा दस्तावेज जमा कराए गए. दस्तावेजों की जांच के बाद 1,768 आवासों की अंतिम जानकारी नजूल और उपजिलाधिकारी कार्यालय को सौंपी गई. किंतु बाद में योजना ठंडे बस्ते में चली गई.