Deepak Bajaj

    नागपुर. वित्तीय धांधली को लेकर आरोपी बनाए गए महात्मा गांधी सेंटेनियल सिंधु हाईस्कूल संस्थान के अध्यक्ष दीपक बजाज को 12 नवंबर 2015 को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया. इसके बाद से जिला सत्र न्यायालय और हाई कोर्ट में जमानत के लिए कई बार अर्जियां दायर की गईं लेकिन जमानत नहीं दी गई.

    स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति तथा मुंबई में उपचार की आवश्यकता होने के कारण गत समय हाई कोर्ट ने अस्थायी जमानत प्रदान की थी. मामले में सजा सुनाए जाने से पहले ही 3 वर्ष 8 माह तक जेल में रहने तथा स्वास्थ्य का हवाला देते हुए न्यायाधीश रोहित देव ने अंतत: दीपक बजाज को सशर्त जमानत प्रदान कर दी. अदालत ने आदेश में कहा कि निश्चित ही मामले में सुनवाई में देरी होने से इनकार नहीं किया जा सकता है. ऐसे में स्वास्थ्य को देखते हुए तथा संविधान की धारा 21 के अनुसार आरोप साबित होने से पहले जेल में बंद रखना उचित नहीं है. 

    7 दिन में सरेंडर करें पासपोर्ट

    जमानत प्रदान करते हुए अदालत ने आदेश में कहा कि 7 दिनों के भीतर जांच अधिकारी के पास पासपोर्ट सरेंडर करना होगा. इसी तरह जब तक निचली अदालत सुनवाई के लिए याचिकाकर्ता की उपस्थिति के आदेश नहीं देती है, तब तक शहर सीमा के भीतर प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी. साथ ही जहां भी निवास होगा जांच अधिकारी को उसका पता और मोबाइल नंबर मुहैया कराना होगा. याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधि. धर्माधिकारी ने कहा कि चार्जशीट में कुल 169 गवाहों के नाम शामिल हैं, जबकि अब तक केवल 30 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं. ऐसे में जल्द सुनवाई होने के आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं, जबकि याचिकाकर्ता का स्वास्थ्य ठीक नहीं है. 

    कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त

    -याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि याचिकाकर्ता कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त है. शुरुआत में उसे मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डीन की सलाह पर 80 प्रतिशत ब्लॉकेज होने से कोरोनरी बाइपास सर्जरी कराने का निर्णय लिया गया था. 

    -1 जुलाई 2019 को हाई कोर्ट की ओर से अस्थायी जमानत प्रदान की गई थी. मुंबई के फोर्टिस अस्पताल में बाइपास सर्जरी की गई जिसके बाद 9 सितंबर 2019 को डिस्चार्ज किया गया था. किंतु पुन: 21 सितंबर और 4 अक्टूबर को फिर से भर्ती कराना पड़ा है. 

    -जे.जे. अस्पताल के डीन की अध्यक्षता में कोर्ट ने स्वास्थ्य की जांच के लिए कमेटी गठित की थी. उनकी रिपोर्ट भी प्रेषित की गई. वर्तमान में ब्रीच कैंडी अस्पताल में इलाज किया जा रहा है.