Flowers
File Photo: PTI

    • 50 रुपये किलो ही मिला इस बार शेवंती को भाव
    • 350 रुपये मिला था भाव पिछले वर्ष 
    • 20 रुपये प्रति किलो ही बिका गेंदा
    • 250 रुपये पर गया था पिछली बार
    • 100 से अधिक गाड़ियों की आवक रोज

    नागपुर. त्योहारों की शुरुआत हो और किसी भी वस्तुओं के भाव न बढ़े, यह तो हो ही नहीं सकता. त्योहार आने पर महंगाई को जैसे पंख लग जाते हैं. जैसे ही गणेशोत्सव शुरू होता है तो फूलों के भाव आसमान पर पहुंच जाते हैं लेकिन इस बार फूलों के साथ उल्टा हो रहा है. फूल महंगा होने के बजाय सस्ता मिल रहा है. इस बार रह-रहकर आ रही बारिश ने फूलों को आसमान में पहुंचने से पहले ही झटका दे दिया है. गणेशोत्सव और महालक्ष्मी में 350 रुपये से ऊपर रहने वाली शेवंती को इस बार मात्र 50 रुपये प्रति किलो का ही भाव मिल रहा है.

    वहीं पिछली बार 150 से 200 रुपये चलने वाला गेंदा इस बार 20 रुपये प्रति किलो से ऊपर नहीं उठ पाया. हालांकि महालक्ष्मी के लिए फूल मालाओं का सेट लोगों को काफी महंगे में पड़ रहा है. फूल सस्ता होने के बाद भी माला बनाने वाले हर बार की तरह ही इस बार भी लोगों को महंगाई का झटका देने पर तुले हुए हैं.

    पिछली बार निशिगंधा 800 रुपये प्रति किलो तक गया था जो कि इस बार 400 रुपये प्रति किलो पर ही अटक गया. वहीं पिछले वर्ष 700 रुपये चलने वाला गुलाब इस बार 500 रुपये प्रति किलो में ही सिमट गया.100 रुपये प्रति किलो बिकने वाला जरबेरा 40 से 50 रुपये प्रति किलो ही बिका.

      माल गीला होने से उठाव नहीं

    फूल व्यापारी अरुण वाघुलकर बताते हैं कि बारिश के कारण माल गीला आ रहा है जिसके चलते फूलों में उठाव नहीं है. हिंगोली, अहमदनगर, आड़फाटा, गोंदिया, छत्तीसगढ़ सहित लोकल से फूलों की रोज 100 से अधिक गाड़ियों की आवक हो रही है. माल उठ नहीं पाने से पिछले दिनों व्यापारियों को फूलों को फेंकना भी पड़ा, जिसके चलते काफी नुकसान भी झेलना पड़ा. गणेशोत्सव और महालक्ष्मी त्योहार से उम्मीद थी कि मार्केट अच्छा उठेगा लेकिन इस बार तो बारिश ने ही पूरा धो डाला.

    कोरोना में हुआ नुकसान भी नहीं निकल पाया. अब तो नवरात्र और दिवाली में व्यापार उठने की उम्मीद व्यापारियों द्वारा लगाई जा रही है. चिल्लर में भी गेंदा अधिक से अधिक 50 से 60 रुपये प्रति किलो ही बिक रहा है. जो गेंदा 3 से 4 दिनों तक आराम से ताजा बना रहता है, वह अभी मुश्किल से 2 दिन भी नहीं टिक पा रहा है. इस बार ग्राहकों को फूलों के भाव से राहत मिल रही है. 

    सजावटी फूलों की होती थी डिमांड 

    बड़े-बड़े गणेश पंडालों में सजावट करने के लिए सजावटी फूलों की मांग भी काफी अधिक रहती थी लेकिन कोरोना के कारण बड़-बड़े गणेश पंडालों पर भी ग्रहण लग गया, जिसके चलते सजावटी फूलों की डिमांड भी बहुत कम हो गई है. अभी जो भी डिमांड है वह घरेलू ही हो रही है. अभी तो लोगों को चिल्लर मार्केट में ही सस्ते फूल मिल जाने के चलते लोग भी बहुत अधिक नहीं आ रहे हैं.

    लिली का फूल 100 रुपये सैकड़ा चल रहे हैं, जो कि पिछली बार भी इसी भाव के साथ चल रही थी. लोगों के यहां पर नहीं आने की सबसे बड़ी वजह यहां की गंदगी है. थोड़ी सी बारिश में चारों तरफ गंदगी ही गंदगी फैल जाती है. इस गंदगी के कारण व्यापारियों को बहुत अधिक तकलीफों का सामना करना पड़ता है. 

    फूलों के भाव पर एक नजर (रुपये प्रति किलो में)

    फूल पिछले वर्ष इस वर्ष

    गुलाब 700 500 

    शेवंती 350 50

    गेंदा 250 20

    जरबेरा 100 40