ओपन-ओबीसी बच्चों को भी मुफ्त गणवेश, स्टैंडिग कमेटी ने दी मंजूरी

नागपुर. पिछले अनेक वर्षों से जिला परिषद की शालाओं में पढ़ने वाले ओपन व ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों को भी मुफ्त में गणवेश देने के लिए प्रस्ताव रखे जा रहे हैं लेकिन अब तक इसे अमल में नहीं लाया जा सका. पूर्व जिप सदस्य व डीपीसी सदस्य शिवकुमार यादव और विद्यमान उपाध्यक्ष मनोहर कुंभारे ने जिला नियोजन समिति की बैठकों में यह मांग उठाते रहे थे. जब डीपीसी में कोई सुनवाई नहीं हुई तो तात्कालीन शिक्षा समिति सभापति उकेश चौव्हाण ने बजट में 20 लाख रुपयों का प्रावधान किया था. उसके बाद विद्यमान सभापति ने 45 लाख रुपयों का प्रावधान किया जिसे स्थायी समिति ने मंजूरी दे दी है.

अब जिले की जिप शालाओं में पढ़ने वाले ओपन व ओबासी वर्ग के बच्चों को भी मुफ्त में गणवेश देने का मार्ग प्रशस्त हो गया है. बताते चलें कि इससे जिले के 16000 बच्चों को लाभ होगा. केवल इन्हें छोड़कर शेष प्रवर्ग के बच्चों को मुफ्त में गणवेश दिया जाता था. इससे ये बच्चे मन मसोस कर रह जाते थे. इसी के चलते यादव व कुंभारे ने डीपीसी में यह मुद्दा उठाया था. अंतत: जिप के सेस फंड से प्रावधान कर गणवेश देना सुनिश्चित किया गया है.

पद संभालते ही किया था वादा
बताते चलें कि पदभार संभालते ही अध्यक्ष रश्मि बर्वे, उपाध्यक्ष मनोहर कुंभारे और शिक्षा समिति सभापित भारती पाटिल ने ओबीसी व ओपन वर्ग के बच्चों को भी मुफ्त गणवेश देने का वादा किया था. उन्होंने उस वादे को पूरा किया. जिले में जिला परिषद की 1535 शालाएं हैं. हर वर्ष इन शालाओं में बच्चों की संख्या कम होती जा रही है. पटसंख्या कम होने से रोकने के लिए सरकार ने पहले सर्व शिक्षा अभियान व समग्र शिक्षा अभियान के तहत मुफ्त गणवेश योजना शुरू की. इसमें पहली से आठवीं तक के एससी, एसटी, बीपीएल प्रवर्ग के छात्रों और सभी प्रवर्ग की छात्राओं को लाभ दिया जाता है.

ओबीसी और ओपन वर्ग के छात्रों को इस योजना का लाभ नहीं मिलता था. इसलिए ही यादव व कुंभारे ने डीपीसी से फंड मांगा था. बाद में उकेश चौव्हाण ने सेस फंड से ही 20 लाख का प्रावधान किया लेकिन जिप प्रशासन के अड़ियल रवैये के कारण बच्चों को लाभ नहीं मिल पाया. अब विद्यमान सभापति ने 45 लाख का प्रावधान किया है जिसे स्थायी समिति ने ग्रीन सिगनल दे दिया है.