Government improve the condition of Trauma Care Center

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नागपुर. महामार्गों से लगे शहरों में ट्रामा केयर सेंटर शुरू करने का उद्देश्य था कि किसी भी दुर्घटना के वक्त घायलों को तत्काल उपचार मिल सके लेकिन विभाग में जितने भी ट्रामा केयर सेंटर है, उनकी हालत ठीक नहीं है. सुविधाओं का अभाव, डॉक्टरों की कमी के चलते ट्रामा केयर सेंटर में घायलों का संपूर्ण इलाज नहीं हो पाता.

स्थिति यह है कि दुर्घटना में घायलों को नागपुर के मेडिकल, एम्स में रेफर करना पड़ता है. शीत सत्र के लिए सरकार नागपुर में आई है. उम्मीद है कि ट्रामा केयर सेंटर के अपग्रेडेशन पर चर्चा कर बेहतर बनाने की दिशा में निर्णय लिया जाएगा. सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने महामार्गों पर लगे शहरों में 12 ट्रामा केयर सेंटर बनाने का निर्णय लिया था.

इनमें पूर्व विदर्भ के वर्धा जिले में हिंगनघाट, कारंजा और गोंदिया जिले के देवरी तहसील में ट्रामा केयर सेंटर तैयार किये हैं लेकिन इन सेंटरों पर डॉक्टरों का अभाव बना हुआ है. इस वजह से दुर्घटना में घायल हुए लोगों को उपचार का लाभ नहीं मिल रहा है. वहीं नागपुर, नागपुर जिले में 3 सेंटर का समावेश हैं. काटोल का ट्रामा केयर सेंटर शुरू तो गया लेकिन भिवापुर और उमरेड सेंटर की हालत जस की तस है. ट्रामा सेंटर को लेकर सरकार भी गंभीर नहीं है. 

नीति में बदलाव की जरूरत 

दरअसल पिछले वर्षों में सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया है. सरकार चाहती है कि ठेकेदारी पद्धति पर डॉक्टरों की नियुक्ति की जाये. ट्रामा केयर के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की आवश्यकता होती है. ठेकेदारी पद्धति पर कार्य करने वाले नियमित सेवा नहीं दे सकते हैं. वहीं सरकार वेतन भी पर्याप्त नहीं देना चाहती. यही वजह है कि नियुक्ति नहीं हो सकी. सभी ट्रामा केयर सेंटर पर सुविधाओं का अभाव दिखाई देता है. ट्रामा केयर सेंटर बनने के बाद वहां सीटी स्कैन, एमआरआई मशीन, डिजिटल एक्स-रे मशीन, ब्लड स्टोरेज यूनिट, ऑटो एनालाइजर आदि मशीनें आवश्यक होती हैं.

नियमानुसार एक ट्रामा केयर सेंटर में अस्थिव्यंग शल्य चिकित्सक-1, बधिरीकरण विशेषज्ञ-2, वैद्यकीय अधिकारी-2, नर्स-4, एंबुलेंस चालक-1, कक्ष सेवक -3 और सफाईकर्मी-2 होने चाहिए. हालांकि ट्रामा केयर सेंटर को चलाने में खर्च अधिक आता है लेकिन घायलों को सुविधा भी तत्काल मिल सकती है. इससे बड़े शहरों की ओर ताकने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. 

समृद्धि महामार्ग से शहरों में बने सेंटर 

समृद्धि महामार्ग पर हर आये दिन दुर्घटनाएं होती है. कई बार घायलों को तत्काल मदद नहीं मिलने से मौत भी हो जाती है. अब सरकार को चाहिए कि समृद्धि महामार्ग से शहरों में ट्रामा केयर सेंटर शुरू करे. इसके लिए विपक्ष को भी मांग उठाना होगा. साथ ही ट्रामा केयर सेंटर की जरूरतों को बताना होगा लेकिन इसके लिए इच्छा शक्ति की जरूरत है.

भीषण दुर्घटना होने पर सरकार द्वारा मृतक के परिजनों को सहायता निधि उपलब्ध कराई जाती है. इसी तरह की निधि को सेंटर के निर्माण पर खर्च किया जाये तो यह वर्षों तक काम आएगा. इसके साथ ही दुर्घटना में मृतकों का आंकड़ा भी कम किया जा सकता है. अधिवेशन में इस मुद्दे पर चर्चा होना आवश्यक है, क्योंकि यह मुद्दा आम जनता से जुड़ा है. सरकार को गंभीरता से विचार करते हुए पुराने ट्रामा केयर सेंटर को अपडेट कर नये सेंटर भी शुरू करने की दिशा में अभी से कार्य करना होगा. तभी भविष्य में लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा.