Nagpur News: हलबा के साथ विश्वासघात, चुनाव पर होगा परिणाम, राष्ट्रीय आदिम कृति समिति नेता पराते ने दी चेतावनी

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नागपुर. हलबा समाज को न्याय दिलाने के लिए कई बार सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आंदोलन किए. राज्य सरकार की ओर से हर समय सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया. किंतु अब तक हलबा समाज को न्याय नहीं मिला है. हलबा समाज के साथ हुए विश्वासघात का आगामी चुनाव पर परिणाम दिखाई देने की चेतावनी राष्ट्रीय आदिम कृति समिति की नेता नंदा पराते ने दी. बुधवार को संविधान चौक पर सरकार के खिलाफ आंदोलन किया गया. आंदोलन के पश्चात हुई सभा में नेताओं ने कहा कि हलबा जनजाति का कोष्टी व्यवसाय है.जिसके लिए राज्य सरकार को अधिसूचना निकालनी चाहिए. चौक पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई.

गर्व से कहो हम आदिवासी हैं, भारत के मूल निवासी हैं

प्रदर्शन के दौरान गर्व से कहो हम आदिवासी हैं, भारत के मूल निवासी हैं. जितनी जिनकी संख्या भारी, उतनी उनकी भागीदारी, आरक्षण हमारा अधिकार है जैसे नारे भी लगाए गए. नेताओं ने कहा कि पूरे देश में जातिगत जनगणना को लेकर आवाज बुलंद हो रही है. राज्य में भी कई जातियां आरक्षण की मांग को लेकर संघर्ष कर रही हैं. हलबा समाज की मांग सबसे पुरानी है लेकिन इसे नजरअंदाज किया जा रहा है. 114 बेगुनाहों का बलिदान होने के बावजूद गोवारी समाज उपेक्षित है. संविधान की सूची में गोंड राजगोंड शब्द में कॉमा लगाने के बाद गोंड जाति का मसला हल होता है. ऐेसे में गोंड गोवारी में कब कॉमा लगाया जाएगा. इसे लेकर भी सरकार से सवाल किया गया.

जाति प्रमाणपत्र दे सरकार

कृति समिति नेता प्रवीण भीसीकर ने कहा कि 40 वर्षों से समाज के साथ अन्याय हो रहा है. कभी जाति प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया शुरू होती है तो कभी बंद कर दी जाती है. इस तरह से समाज को अधर में लटका रखा है. वर्ष 2013 को बचत भवन में आंदोलन के दौरान वर्तमान सरकार के नेताओं ने सत्ता में आने के बाद 6 माह में समस्या हल करने का आश्वासन दिया था. जिसे पूरा नहीं किया गया. उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने 20 अक्टूबर 2023 को   मामले में अहम फैसला सुनाया है. इसे गंभीरता से लेकर केंद्र सरकार को सिफारिश करनी चाहिए. जिससे समाज को न्याय मिल सकेगा. जल्द ही न्याय नहीं मिलने पर तीव्र आंदोलन करने की चेतावनी समिति के विश्वनाथ आसई, डी.बी. नांदकर, प्रकाश निमजे, धनराज पखाले, जीतेन्द्र मोहाड़ीकर, मनोहर घोराडकर, अश्विन अंजीकर, हरेश निमजे, छाया खापेकर, जिजा धकाते आदि ने दी.