Nagpur High Court

    • इसासनी और वागधरा से 15 दिनों में हटाओ अतिक्रमण
    • 126 हेक्टेयर झुड़पी जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा
    • 45 हेक्टेयर में से कुछ जमीन पर इसासनी में अतिक्रमण

    नागपुर. शुक्रवार को हिंगना तहसीलदार को उस समय हाई कोर्ट की फटकार का सामना करना पड़ा जब लंबे समय से इसासनी और वागधरा में अतिक्रमण के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने का मामला उजागर हुआ. हिंगना तहसील के वागधरा में 126 हेक्टेयर झुड़पी जंगल की जमीन तथा इसासनी में 45 हेक्टेयर में से अधिकांश जमीन पर भारी अतिक्रमण होने को लेकर विश्वनाथ गुप्ता द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई. याचिका में अतिक्रमण हटाने के आदेश प्रशासन को देने का अनुरोध किया गया.

    शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश सुनील शुक्रे और न्यायाधीश अनिल पानसरे ने दोनों जमीनों से 15 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने के आदेश तहसीलदार को दिए. साथ ही अतिक्रमण नहीं हटने पर तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई के संकेत भी दिए. याचिकाकर्ता की ओर से अधि. सीएफ भागवानी, सरकार की ओर से सहायक सरकारी वकील एनएस राव और प्रन्यास की ओर से अधि. बीए कुंटे ने पैरवी की.

    12 वर्ष पूर्व ग्राम पंचायत ने पारित किया प्रस्ताव

    सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राजीवनगर से हिंगना स्थित इसासनी तक की पगडंडी के मार्ग पर भी अवैध रूप से कब्जा किया गया जहां पर कई तरह के व्यावसायिक गतिविधियां शुरू की गईं. पास की पहाड़ी क्षेत्र में झुड़पी जंगल के लिए जमीन आरक्षित होने के बावजूद असामाजिक तत्वों द्वारा अतिक्रमण कर अवैध निर्माण कर लिया गया है. मामला उजागर होते ही इसासनी ग्राम पंचायत ने 12 जनवरी 2010 को अतिक्रमण हटाने का प्रस्ताव सभा में पारित किया जिसके बाद 19 जनवरी 2010 को हिंगना तहसीलदार को पत्र लिखकर अतिक्रमण हटाने की मांग की गई.

    आश्चर्यजनक यह रहा कि 2 वर्षों तक प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. इससे इसासनी ग्राम पंचायत ने पुन: 22 नवंबर 2012 को अतिक्रमण हटाने का प्रस्ताव पारित कर तहसीलदार को दिया. 17 जनवरी 2013 को तहसीलदार ने मंडल अधिकारी को अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे किंतु अब तक उसे हटाया नहीं गया है.

    कोई ठोस कदम नहीं

    -उल्लेखनीय है कि पहले ही हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए याचिका दायर की गई थी जिसके बाद सरकारी पक्ष को कोर्ट ने नोटिस जारी की थी. वर्ष 2013 में अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद कुछ नहीं किया गया. 

    -हिंगना तहसीलदार ने 8 वर्ष बाद जून 2021 को जवाब दायर किया था. आश्चर्यजनक यह है कि उस समय और वर्तमान स्थिति में किसी तरह का अंतर नहीं है. अभी भी तहसीलदार द्वारा अतिक्रमण पर अंकुश लगाने की दिशा में उचित कदम उठाने की जानकारी ही दी जा रही है. 

    -अदालत ने आदेश में कहा कि तहसीलदार द्वारा मौखिक आश्वासन भर दिया जा रहा है, जबकि अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है. अत: 15 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने तथा अदालत के समक्ष रिपोर्ट पेश करने के आदेश तहसीलदार को दिए गए.