Nagpur ST Bus Stand

  • सरकार और संगठन के बीच दिनभर चली बैठक रही बेनतीजा

नागपुर. मुंबई में सरकार और संगठन के बीच एसटी कर्मियों की मांगों को लेकर दिनभर चली बैठक बेनतीजा रही. उम्मीद की जा रही थी कि बुधवार को एसटी कर्मियों की हड़ताल खत्म हो जाएगी. इसके लिए परिवहन मंत्री अनिल परब के साथ दो विधायक व संगठन प्रतिनिधियों के साथ मुंबई में दिनभर बैठक चली. शाम को परब ने कर्मियों के लिए वेतन वृद्धि का नया फार्मूला जारी किया लेकिन कर्मचारी सरकार के इस प्रस्ताव को मानने को तैयार नहीं हुये.

दरअसल, सरकार का कहना है कि उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद एक समिति गठित की गई है. यदि समिति ने विलीनीकरण की सिफारिश की तो उसे मान्य किया जाएगा. लेकिन रिपोर्ट आने में करीब 3 महीने का समय लगेगा तब तक हड़ताल कहां तक न्यायोचित है.

बुधवार को सरकार ने कर्मियों के समक्ष वेतन वृद्धि का प्रस्ताव रखा लेकिन कर्मचारियों ने इसे मानने से इनकार कर दिया. यही वजह रही कि रात 10 बजे तक हड़ताल समाप्ति तक कोई निर्णय नहीं हो सका. नागपुर में आंदोलन कर रहे कर्मियों ने बताया कि वेतन वृद्धि की तो मांग ही नहीं की गई थी. हमारी एक मात्र एसटी को सरकार में शामिल करने की है. इस हालत में वेतन वृद्धि का कोई औचित्य ही नहीं है.

सभी का हो रहा नुकसान 

परिवहन मंत्री अनिल परब ने एक बार फिर कर्मचारियों से गुरुवार की सुबह से काम पर लौटने की अपील की. परब ने स्पष्ट किया कि यदि कर्मचारी काम पर लौट जाते हैं तो उनका निलंबन भी वापस ले लिया जाएगा. हजारों की संख्या कर्मचारी बुधवार की रात तक मुंबई के आजाद मैदान में डटे रहे.

माना जा रहा है कर्मचारी नहीं मानें तो फिर सरकार किसी दूसरे फार्मूले पर विचार कर सकती है. इसका निर्णय गुरुवार की शाम तक हो सकता है, क्योंकि हड़ताल न केवल सरकार की किरकिरी हो रही है, बल्कि लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है. बसों से स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों का नुकसान हो रहा है. साथ ही समूची व्यवस्था की लड़खड़ा गई है. कर्मचारियों का कहना है कि सरकार वेतन वृद्धि का लॉलीपॉप देकर मांगों को भूलाने का प्रयास कर रही है. जब वेतन में वृद्धि की जा सकती है तो फिर विलीनीकरण क्यों नहीं किया जा सकता. सरकार कर्मचारियों के संयम की परीक्षा ले रही है. इतने दिनों तक हड़ताल चलने के लिए सरकार ही जिम्मेदार है. वहीं दूसरी ओर लोग परेशान हो गये हैं. 

गणेशपेठ में व्यवसाय चौपट

बस स्टैंड की वजह से गणेशपेठ में विविध तरह के व्यवसाय चलते हैं. होटल, रेस्टोरेंट सहित ऑटो, फल वाले, स्टैंड पार्किंग आदि लोग जुड़े हैं लेकिन हड़ताल से परिसर में सन्नाटा छाया हुआ है. ऑटो वाले और ठेले वाले गायब है. होटलों में ग्राहकों का इंतजार हो रहा है. कोरोना के बाद जैसे-तैसे स्थिति में सुधार हुआ था लेकिन हड़ताल ने फिर से कई लोगों को सड़क पर ला दिया है. रोजगार छीन जाने से लोग निराश है. यही वजह है कि केवल यात्रियों की ही नहीं, बल्कि सभी की नजरें एसटी कर्मियों की हड़ताल पर लगी हुई है.