Nagpur High Court

    नागपुर. प्रन्यास की ओर से डीपी प्लान में सार्वजनिक उपयोग के तहत विभिन्न कार्यों के लिए आरक्षित जमीन को न केवल लीज पर आवंटित कर दी बल्कि गैर कानूनी ढंग से किए गए कार्यों पर पर्दा डालने के लिए आरक्षण रद्द करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया. मामला में भ्रष्टाचार की बू आने के बाद हाई कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया. बुधवार को न्यायाधीश सुनील शुक्रे और न्यायाधीश अनिल किल्लोर ने हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश झका हक की अध्यक्षता में एक सदस्यीय समिति बना दी. समिति को सम्पूर्ण मामले तथा इस तरह के अन्य मामले हो तो उसकी भी जांच कर अदालत को रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए.

    अदालत मित्र के रूप में अधिवक्ता एम. अनिलकुमार, याचिकाकर्ता की ओर से स्वयं एस.एस. सड्डल, प्रन्यास की ओर से अधिवक्ता आर.ओ. छाबरा और सरकार की ओर से अधिवक्ता डी.पी. ठाकरे ने पैरवी की. उल्लेखनीय है कि एनआईटी द्वारा लीज में दी गई जमीन में खरीदे गए प्लॉट को मंजूरी नहीं मिलने तथा प्लॉट आरक्षण में होने का मामला उजागर होने के बाद जगजीत सिंह शार्दुल सिंह सड्डल ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

    प्रन्यास ने लीज और मनपा ने विकास के लिए दी मंजूरी

    बुधवार को हाई कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश में कहा गया कि प्राथमिक स्कूल और खेल मैदान के लिए आरक्षित जमीन प्रन्यास ने आरक्षण रद्द करने से पहले लीज पर प्रदान की. यहां तक कि मनपा ने भी आरक्षण रद्द न कर इस पर विकास के लिए मंजूरी प्रदान की. जिससे धांधली में लिप्त अधिकारियों का खुलासा करने के लिए तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मामले की जांच जरूरी है. अदालत ने उपयुक्त कार्रवाई के लिए निर्धारित समिति से सुझाव देने के आदेश दिए. साथ ही सेवानिवृत्त न्यायाधीश हक के सहयोग के लिए निजी सचिव, एक क्लर्क की नियुक्ति न्या. हक से अनुमति लेकर डेप्युटेशन या कॉन्ट्रैक्ट पर करने को हरी झंडी दी. 

    रविभवन में जांच समिति का कार्यालय

    अदालत ने रवि भवन में सभी आवश्यकताओं के साथ समिति को कार्यालय उपलब्ध कराने के आदेश दिए. अदालत ने आदेश में कहा कि समिति जनता से या उनके वकीलों के माध्यम से आपत्तियां, सुझाव भी आमंत्रित कर सकेगी. समिति की अनुमति से संबंधित लोग दस्तावेज उपलब्ध करा सकेंगे. जांच कर रिपोर्ट प्रेषित करने के लिए दस्तावेज मांगने,सबूत जुटाने,अधिकारियों को समन जारी करने, संबंधित कर्मचारियों स्टाफ और इससे जुडे पक्षों को उपस्थित रहने के आदेश देने का अधिकार भी समिति को प्रदान किया. 

    NIT-NMC के सभी दस्तावेज सचिव के हवाले

    -अदालत ने आदेश में प्रन्यास और मनपा द्वारा प्रेषित किए गए सभी संबंधित दस्तावेज समिति के सचिव के हवाले करने के आदेश दिए. समिति की आवश्यकता और अनुमति के अनुसार अदालत मित्र दस्तावजों का अवलोकन कर सकेंगे. 

    -प्रत्येक बैठक के लिए समिति के अध्यक्ष को 15 हजार रु. मानधन दिया जाएगा. साथ ही सचिव और अन्य स्टाफ को मनपा और प्रन्यास की ओर से भुगतान किया जाएगा. 

    -जांच समिति के अध्यक्ष न्या. हक को उनके अनुरोध के अनुसार परिवहन सेवा उपलब्ध कराई जाएगी. तमाम खर्चे मनपा और प्रन्यास को करने होंगे. अदालत ने जांच समिति की पहली बैठक से 6 माह के भीतर रिपोर्ट सौंपने के आदेश भी दिए.