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    नागपुर. विधान परिषद चुनाव में प्रत्याशी को लेकर भले ही राजनीतीक दल फिलहाल पत्ते नहीं खोल रहे हो, लेकिन कांग्रेस और भाजपा में प्रत्याशी को लेकर मंथन शुरू हो गया है. भाजपा में जहां प्रत्याशी यहीं निश्चित होना है, वहीं हमेशा की तरह कांग्रेस का प्रत्याशी दिल्ली से निश्चित होने के कारण प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले दिल्ली दरबार पहुंचने की जानकारी सूत्रों ने दी. राजनीतिक जानकारों के अनुसार चूंकि 16 नवंबर से विधान परिषद की सीटों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करना शुरू हो जाएगा, अत: उससे पहले राजनीतिक दलों की ओर से प्रत्याशी के नाम पर मुहर लग जाएगी. अब केवल 4 दिन का समय बचा होने के कारण प्रत्येक दल में बैठकों का दौर जारी है. जानकारों के अनुसार स्थानीय निकायों के पार्षदों के वोट से चुनकर जानेवाले विधान परिषद के इस सदस्य को न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों से भी वोट प्राप्त करना है जो दोनों दलों में से कोई भी चुनाव लड़े लेकिन किसी के लिए भी आसान नहीं होनेवाला है.

    भाजपा का पार्लियामेंट्री बोर्ड का राग

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार इस तरह के चुनाव में सर्वाधिक ‘अर्थतंत्र’ काम करता है. यहीं कारण है कि राजनीतिक दलों में ऐसे ही सक्षम व्यक्ति पर विचार किया जा रहा है. भाजपा की ओर से हमेशा की तरह पार्लियामेंट्री बोर्ड में नाम निश्चित होने का राग आलापा जा रहा है. जबकि राजनीति समझनेवाले लोगों के लिए कोई भी मुश्किल नहीं है कि नाम कहां से अंतिम होगा. इसके बावजूद प्रक्रिया दिखाने के लिए पार्लियामेंट्री बोर्ड का नाम लिया जा रहा है.

    माना जा रहा है कि मंत्री रहे चंद्रशेखर बावनकुले ने विधान परिषद के सहारे सदन में पहुंचने से इनकार कर दिया है. कुछ समय पहले तक बावनकुले ही भाजपा के प्रत्याशी होने की चर्चाएं जोरों पर थी लेकिन उनके इनकार करने के बाद दूसरे प्रत्याशी की खोज हुई. जानकारों के अनुसार इसमें अब सबसे पहले नंबर पर स्थायी समिति के सभापति रहे वीरेन्द्र कुकरेजा का नाम है. जिस पर जल्द ही मुहर लगने की संभावना भी सूत्रों ने जताई.

    कांग्रेस भी देगी तगड़ा प्रत्याशी

    सूत्रों के अनुसार चूंकि इस चुनाव में महानगर पालिका, जिला परिषद, नगर परिषद और नगर पंचायत के सदस्यों द्वारा वोटिंग किया जाना है. अत: शहरी और ग्रामीण के नेताओं का साथ भी प्रत्याशी को मिलना जरूरी है. विशेष रूप से कांग्रेस के प्रत्याशी के लिए इसकी अधिक आवश्यकता है. वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महानगर पालिका में भले ही भाजपा का संख्याबल अधिक हो, लेकिन गत कुछ चुनावों में ग्रामीण क्षेत्रों के चुनावों में कांग्रेस और राकां ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है. भाजपा से जिला परिषद छीनी गई. इसी तरह नगर परिषदों में भी अच्छी संख्या अर्जित की गई है. राज्य में चल रही महाविकास आघाड़ी की सरकार तथा सरकार और विपक्ष के बीच चल रही अनबन को देखते हुए महाविकास आघाड़ी इस चुनाव में भी एकजूट रहने के आसार है. यहीं कारण है कि कांग्रेस भी तगड़ा प्रत्याशी देने की जुगत में है.