EDIBLE OIL

    • 3 रुपये प्रति किलो गिरे भाव
    • 50 रुपये टिन की आई गिरावट 2 दिनों में
    • 70 रुपये टिन और गिर सकता है 2 से 3 दिनों में

    नागपुर. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें लोगों को मुश्किल में डाल रही हैं लेकिन त्योहारों में खाद्य तेल ने महंगाई से थोड़ी राहत जरूर दी है. सरकार द्वारा आयात शुल्क में की गई कटौती से सोयाबीन, पाम सहित सभी तेलों में गिरावट आई है. सोया व पाम क्रूड ऑयल में आयात शुल्क जहां जीरो प्रतिशत कर दिया गया है, वहीं रिफाइंड पर आयात ड्यूटी 12.5 प्रतिशत पर बनी हुई है. सरकार के इस निर्णय से फल्ली को छोड़कर सभी तेलों के टिन में 50 से 60 रुपये और प्रति किलो में 3 रुपये की गिरावट आई है. 2,300 से 2,320 रुपये टिन चल रहा सोयाबीन अभी 2,250 से 2,270 रुपये प्रति टिन व 155 रुपये से घटकर 152 रुपये प्रति किलो पर आ गया है. 

    बड़ी कम्पनियों को लाभ, किसानों को नुकसान

    व्यापारियों के अनुसार सरकार द्वारा सीजन में आयात शुल्क में कटौती करने का अर्थ है बड़ी मल्टी नेशनल कम्पनियों को फायदा पहुंचाना. तेल टूटा है तो सोयाबीन का बीज भी टूटेगा. अभी नया सोयाबीन मार्केट में आना शुरू हुआ है. पिछले 10,900 रुपये प्रति क्विंटल भाव को देखते हुए किसानों को नये सोयाबीन से बहुत सी उम्मीदें थीं लेकिन सरकार के इस निर्णय से सीड्स के भाव में भी गिरावट आएगी. इससे किसानों को नुकसान होगा. कम भाव में मल्टी नेशनल कम्पनियां अधिक सीड्स खरीदकर स्टॉक कर लेंगी.

    सरकार को सीजन खत्म होने के बाद आयात शुल्क में कटौती करनी थी जिससे किसानों को सीड्स के अच्छे भाव मिल जाते. अभी तेलों के टिन में 50 रुपये की गिरावट आई है लेकिन 1-2 दिन में और 70 रुपये टिन और किलो में 4 रुपये की गिरावट आ सकती है. आयात शुल्क में कटौती से पाम तेल 2,050 से 2,070 रुपये प्रति टिन यानी 145 रुपये प्रति किलो पर आ गया है. इसी तरह सनफ्लावर तेल 10 रुपये प्रति किलो की गिरावट के साथ 160 रुपये पर आ गया. 

    थोक में सस्ता, चिल्लर में महंगा

    थोक में तो तेल सस्ता हो गया है लेकिन अभी चिल्लर की दूकानों में आयात शुल्क कटौती का अब तक कोई असर नहीं हुआ है. इसके चलते चिल्लर में लोगों को पुरानी दरों पर ही तेल बेचा जा रहा है. थोक व्यापारियों के अनुसार चिल्लर दूकान वाले 2 से 3 दिन के बाद कीमतों में कटौती करते हैं. हालांकि कई बार देखा जाता है कि कई दूकानदार इसमें किसी तरह की कटौती नहीं करते और लोगों को पुरानी कीमतों पर ही तेल बेचते हैं.  उन पर किसी तरह की लगाम नहीं लगाई जाती.