Maharajbagh Zoo, nagpur

  • 3 दिन में करीब 1 लाख की इनकम

नागपुर. कोरोना संकट की वजह से मार्च से लागू हुये लॉकडाउन के बाद से महाराजबाग चिड़ियाघर बंद था. इस वजह से महाराजबाग की व्यवस्था को चलाने में दिक्कतें आ रही थी. स्थिति यह हो गई कि दैनिक वेतन भोगियों को दो महीने से वेतन नहीं मिला. आर्थिक समस्या को देखते हुए जिलाधिकारी ने रविवार से खोलने को मंजूरी दे दी. इसके साथ ही लोगों ने भी राहत की सांस ली. पिछले 3 दिनों के भीतर टिकट और पार्किंग से महाराबाज को करीब 1 लाख की आय हुई है.

सिटी के मध्यभाग के स्थित महाराजबाग अब भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बन है. वन्य प्राणियों के करीब से देखने की इच्छा लेकर जाने वाले निराश नहीं होते. हालांकि कोरोना की गाइड लाइन्स की वजह से 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है, लेकिन युवावर्ग की भीड़ लग रही है.

रविवार को महाराजबाग में 1500 लोग पहुंचे. वहीं सोमवार और मंगलवार को 1000-1000 से अधिक लोग पहुंचे. दर्शकों से टिकट ली जाती है. साथ ही पार्किंग शुल्क भी लिया जाता है. उक्त दोनों शुल्क के लिए हर वर्ष ठेका दिया जाता है. यह ठेका 1 करोड़ से अधिक का ही होता है, लेकिन इस बार कोरोना की वजह से ठेकेदार को भी नुकसान सहन करना पड़़ा है. पिछले 3 दिनों के भीतर टिकट और पार्किंग के माध्यम से 1 लाख की आय हुई है. थर्टी र्फस्ट और न्यू ईयर की वजह से अगले 2-3 दिनों तक भीड़ रहने की उम्मीद है.

वन्यप्राणियों के करीब से हो रहे दर्शन

महाराजबाग में 2 बाघ, 5 तेंदुए, 30 हिरण, 15 बारहासिंगा, 15 नीलगाय, 4 मोर, 2 मगर, 5 बंदर, 5 भालू, 1 लोमड़ी समेत कुल 300 वन्यजीवों को रखा गया हैं. इसके साथ गार्डन वाले हिस्से में बच्चों के लिए फिसलन पट्टी समेत कई उपकरण लगे हैं. वन्य जीवों को करीब से देखने की इच्छा महाराजबाग में पूरी होती है.

जिलाधिकारी ने दर्शकों के लिए कोविड काल के दिशा-निर्देश भी जारी किये है. यहां आने वाले दर्शकों को पहले सेनेटाइज किया जा रहा है. साथ ही मास्क लगाने वालों को ही प्रवेश दिया जा रहा है. कर्मचारियों द्वारा यह सतत रूप से ध्यान रखा जा रहा है कि किसी एक जगह भीड़ न बढ़ें. इसके लिए कर्मचारियों को भी तैनात किया गया है.