Nagpur High Court

    नागपुर. मोमिनपुरा में मनपा द्वारा की गई कार्रवाई को चुनौती देते हुए एमएल कैंटीन के मालिक की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई. याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित सहायक आयुक्त अशोक पाटिल के निर्देशों के अनुसार अधि. जैमिनी कासट ने कहा कि मनपा ने एमएल कैंटीन खाली कराने की कार्रवाई नहीं की गई, जबकि अवैध निर्माण को लेकर कार्रवाई की गई है.

    मनपा के खुलासा किए जाने के बाद न्यायाधीश अमित बोरकर ने याचिका का निपटारा कर दिया. याचिकाकर्ता की ओर से अधि. सैयद अहमद और मनपा की ओर से अधि. जैमिनी कासट ने पैरवी की. याचिकाकर्ता का मानना था कि एमएल कैंटीन यह मुस्लिम लाइब्रेरी का ही हिस्सा है जहां गांधीबाग जोन की ओर से जेसीबी से कार्रवाई कर तोड़ू कार्रवाई की गई.

    70 वर्षों से किरायेदार, नहीं दिया नोटिस

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता यहां पर 70 वर्षों से व्यवसाय कर रहा है. मनपा का किरायेदार होने के नाते कार्रवाई से पूर्व नोटिस दिया जाना चाहिए था किंतु नोटिस दिए बिना ही कार्रवाई की गई. होटल का संचालन करने के लिए एफडीए विभाग ने लाइसेंस भी दिया है. याचिकाकर्ता का मानना था कि मुस्लिम लाइब्रेरी कैंटीन के नाम से बिर्यानी का व्यवसाय किया जा रहा है. मुस्लिम लाइब्रेरी ट्रस्ट के किरायेदार हैं जिन्हें मनपा की ओर से लीज प्राप्त है. मुस्लिम लाइब्रेरी और मनपा के बीच चल रहे न्यायिक विवाद की उन्हें जानकारी नहीं है. अचानक भारी पुलिस बंदोबस्त के साथ मुस्लिम लाइब्रेरी पर बुलडोजर चला दिया गया. यहां तक कि कैंटीन का निर्माण भी तोड़ा गया है. 

    नियम-कानून के अनुसार लेंगे पजेशन

    शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मनपा की ओर से पैरवी कर रहे अधि. कासट ने अदालत को बताया कि मुस्लिम लाइब्रेरी के साथ चल रही न्यायिक लड़ाई में संबंधित कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का मनपा पूरा पालन कर रही है. नियम-कानून के अनुसार ही सम्पत्ति को अधिकार में लिया जाएगा. प्रक्रिया किए बिना पजेशन नहीं लिया जाएगा. याचिकाकर्ता का मानना था कि अचानक कार्रवाई के संदर्भ में मनपा से पूछे जाने पर उन्होंने मुस्लिम लाइब्रेरी की लीज खत्म होने की जानकारी दी थी. याचिकाकर्ता मुस्लिम लाइब्रेरी ट्रस्ट का किरायेदार होने की मनपा को पूरी जानकारी है. अत: कार्रवाई से पूर्व नोटिस जारी किया जाना चाहिए था लेकिन नियमों के अनुसार न तो नोटिस दिया गया और न ही कोई सूचना दी गई.