Nagpur High Court
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    नागपुर. ग्राम पंचायत चुनाव तथा सीधे सरपंच पद के चुनाव को लेकर निर्धारित आरक्षण को लेकर जिलाधिकारी द्वारा जारी नोटिफिकेशन को चुनौती देते हुए कामठी तहसील के सुरादेवी ग्राम पंचायत के सरपंच सुनील दुधपचारे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की.

    इस पर हुई लंबी सुनवाई के बाद न्यायाधीश अतुल चांदूरकर और न्यायाधीश अनिल पानसरे ने 5 मार्च 2020, 25 नवंबर 2020 तथा 9 नवंबर 2022 को जारी किए गए नोटिफिकेशन पर हस्तक्षेप से इनकार कर याचिका निरस्त कर दी. अदालत ने आदेश में कहा कि चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है. ऐसे में इसमें दखलंदाजी करना उचित नहीं है. याचिकाकर्ता ने याचिका में बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर नागपुर जिले की ग्राम पंचायतों में आरक्षण निर्धारित कर जिलाधिकारी की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया गया. 

    2025 तक रहेगा आरक्षण

    याचिकाकर्ता ने कहा कि जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार यह आरक्षण वर्ष 2020 से 2025 तक जारी रहेगा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं रह सकता है लेकिन नागपुर जिले में यह आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक जा रहा है. राज्यभर की 7,751 ग्राम पंचायतों के चुनाव होने जा रहे हैं.

    जिसके लिए 9 नवंबर 2022 को राज्य चुनाव आयोग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. ग्राम पंचायतों के चुनावों के साथ ही सरपंच पद के लिए भी सीधे चुनाव होने जा रहे हैं. याचिकाकर्ता की ओर से अधि. अक्षय नाईक, राज्य सरकार की ओर से अधि. निवेदिता मेहता और राज्य चुनाव आयोग की ओर से अधि. जैमिनी कासट ने पैरवी की.

    जिले की 768 ग्रापं के चुनाव

    याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कहा कि नागपुर जिले में कुल 768 ग्राम पंचायतें हैं. इनमें अलग-अलग वर्ग के लिए 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण लागू किया गया जिससे केवल 331 पद खुले वर्ग के लिए रह गए हैं. नियमों में अब 50 प्रतिशत तक ही आरक्षण निश्चित रखने के लिए ओबीसी का आरक्षण 27 प्रतिशत से भी कम किया गया है. राज्य चुनाव आयोग स्वतंत्र इकाई होने के कारण आरक्षण को 50 प्रतिशत तक सीमित रखने के लिए आदेश जारी करने चाहिए थे.

    सुको द्वारा दिए गए फैसले का ग्रामीण विकास मंत्रालय, राज्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार द्वारा  पालन किया जाना चाहिए था. राज्य चुनाव आयोग की ओर से पैरवी कर रहे अधि. जैमिनी कासट ने कहा कि 5 मार्च और 25 नवंबर के नोटिफिकेशन को चुनौती देने में याचिकाकर्ताओं ने काफी देर कर दी है. सरपंच पद पर सीधे चुनाव किए जा चुके हैं. तमाम पहलुओं पर सुनवाई के बाद अदालत ने उक्त आदेश जारी किया.