नागपुर का फर्जी बिल: दिल्ली में बरामद हुई 53 लाख की सुपारी

  • नागपुर के गुरुदेव ट्रेडर्स ने दिया था बिल
  • GST चोरी के लिए कंपनियों का बड़ा खेल

नागपुर. जीएसटी में खेल करने के लिए कारोबारी तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं. फर्जी कंपनियों का मामला सामने आने के बाद भी कारोबारी फर्जीवाड़ा करने से बाज नहीं आ रहे हैं. ऐसे कई मामले विभाग के अधिकारी पकड़ चुके हैं. पंजीयन रद्द होने के बाद भी कंपनी माल अपने बिल पर भेज रही है और बोगस फर्में उसी फर्जी तरीके से माल की खरीदी और बिक्री के फर्जी इनवाइस जारी कर एक जगह से दूसरे जगह माल ले जा रही हैं. वाणिज्य कर के दल ने इस तरह की एक फर्म पकड़ी है जिसका पंजीयन रद्द कराया जा चुका था लेकिन फिर भी कर अपवंचना करते हुए उसी फर्म के बिल से माल भेजा जा रहा था.

नागपुर के गुरुदेव ट्रेडर्स से अगस्त में कानपुर के राजपूत ट्रेडर्स ने सुपारी मंगाई थी. कानपुर के जूही में पुलिस ने इसे पकड़ा और वाणिज्य कर विभाग (जीएसटी) के अधिकारियों को सूचित किया. अन्वेषण दल के अधिकारी मौके पर पहुंचे तो पाया कि जहां से माल आया था वह फर्म भी फर्जी थी और जहां से माल आ रहा था वह भी फर्जी थी. केंद्रीय माल एवं सेवा कर विभाग के क्षेत्राधिकार में होने की वजह वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों ने संस्तुति कर फर्म का पंजीयन रद्द करा दिया. इसके बाद पिछले दिनों सचल दल टीम ने इंगट ले जा रहे एक ट्रक को डंकन चौराहा के पास पकड़ा. ट्रक कानपुर से दिल्ली जा रहा था.

कानपुर के जांच दल के सहायक आयुक्त दीपक जायसवाल ने इंगट के पर्चे जांचे तो पाया कि जिस राजपूत ट्रेडर्स का पंजीयन बोगस होने की वजह से रद्द कराया जा चुका था, उसी फर्म के नाम पर दिल्ली माल भेजा जा रहा था. इस ट्रक को पकड़ लिया गया और उस पर लदे 53 लाख रुपये के माल को भी सीज कर लिया गया. संबंधित फर्म की जांच कराई जा रही है और माल लेने वाले का भी पता किया जा रहा है. एडीशनल कमिश्नर ग्रेड-दो जोन-दो अरविंद कुमार मिश्रा ने बताया कि कई बोगस फर्म पंजीयन रद्द होने के बाद भी अपने बिल जारी कर रही हैं क्योंकि उनका उद्देश्य सिर्फ कर अपवंचना करना है. इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं जिन पर सतर्क निगह रखी जा रही है. माल लेने वाला कोई सामने आएगा तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

नागपुर में भी जांच जारी

इस मामले में जीएसटी जांच दल नागपुर में भी छानबीन कर रहा है. कानपुर के इनपुट के आधार पर जांच में पाया गया कि कंपनी का अस्तित्व तो है लेकिन पंजीयन रद्द कर दिया गया था. सुपारी के कारोबार से जुड़ीं अधिकांश फर्म इसी प्रकार फर्जीवाड़ा कर रही हैं. लाखों का माल इधर से उधर किया जा रहा है लेकिन अधिकांश लोग विभाग की नजरों से ओझल हैं और मजे में देशभर में सुपारी का कारोबार कर रहे हैं. डीआरआई की ओर से भी कई मामलों में पूछताछ हो रही है. राजू अण्णा, वल्लभदास के टिकू सहित कई अन्य व्यापारियों के नाम सामने आ रहे हैं.