Kanak

    नागपुर. शहर को कचरा मुक्त करने के उद्देश्य से मनपा द्वारा कनक रिसोर्सेस मैनेजमेंट नामक कम्पनी को कचरा संकलन का ठेका आवंटित किया गया था. जिसके लिए मनपा की ओर से समय-समय पर भुगतान किया गया. मनपा ने आवश्यक भुगतान से अधिक निधि कम्पनी को दे दी थी. जिसे लेकर मनपा और कम्पनी के बीच लंबा विवाद चला. न्यायिक प्रक्रिया में भी मनपा को भुगतान करने के आदेश कम्पनी को दिए गए लेकिन भुगतान नहीं किए जाने के कारण अब मनपा ने कनक के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. इस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किल्लोर ने कनक रिसोर्सेस कम्पनी को नोटिस जारी कर 10 अप्रैल तक जवाब दायर करने के आदेश दिए. याचिकाकर्ता की ओर से अधि. अरुण अग्रवाल ने पैरवी की.

    24 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान

    बताया जाता है कि मनपा की ओर से कम्पनी को 24 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान किया गया था. मामला उजागर होने के बाद मनपा ने वसूली के लिए कम्पनी को नोटिस जारी किया था जिसके खिलाफ कम्पनी ने जिला न्यायालय में मामला दर्ज किया था. कम्पनी का मानना था कि उसे ही मनपा से 21 करोड़ रु. से अधिक का निधि लेना है. जबकि उसके खिलाफ ही वसूली निकाली जा रही है. जिला न्यायालय की ओर से वसूली पर रोक लगाई गई थी. साथ ही विवाद को हल करने के लिए आर्बिट्रेशन(माध्‍यस्‍थम) की प्रक्रिया पूरी करने के आदेश मनपा को दिए थे. जिसके अनुसार मनपा द्वारा पूर्व न्यायाधीश आर.सी. चव्हाण को आर्बिट्रेटर नियुक्त किया गया. उनके समक्ष चली सुनवाई के बाद अदालत ने जहां कम्पनी का दावा खारिज कर दिया था, वहीं मनपा के दावे को सही साबित किया था. 

    आदेश के बाद भी वसूली नहीं

    बताया जाता है कि मनपा की ओर से कम्पनी का ठेका दौरान ही 8 करोड़ के करीब निधि वसूल की गई थी. किंतु कम्पनी से तकरीबन 16 करोड़ वसूल करना बाकी था. आर्बिट्रेशन का आदेश जारी होने के बाद मनपा द्वारा यह राशि वसूल की जानी थी. किंतु वसूल नहीं की गई. अब हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई. याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने कम्पनी को नोटिस पहुंचाने के आदेश याचिकाकर्ता मनपा को दिए. साथ ही इस संदर्भ में हलफनामा दायर करने के आदेश भी मनपा को दिए. इसी तरह से याचिका के कुछ अंशों पर कार्यालय द्वारा आपत्ति जताई गई. जिसका निरसन करने के आदेश भी मनपा को दिए.