Nagpur University Vice Chancellor Dr. Subhash Chaudhary suspended

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नागपुर. राष्ट्र संत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति पद से निलंबित किए जाने की कार्रवाई तथा विभागीय जांच के लिए निर्धारित दोषारोप को चुनौती देते हुए पूर्व वीसी सुभाष चौधरी की ओर से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया. सोमवार को दोनों पक्षों की ओर से दी गई दलिलों के बाद हाई कोर्ट ने सुनवाई खत्म कर फैसला सुरक्षित कर लिया. किंतु निलंबन को अंतरिम स्थगन देने की याचिकाकर्ता की गुहार को नकार दिया. उल्लेखनीय है कि वीवी के कुलपति रमेश बैस ने 21 फरवरी को आदेश जारी कर चौधरी को निलंबित कर दिया. साथ ही गडचिरोली के गोंडवाना वीवी के उपकुलपति डा. प्रशांत बोकारे को नागपुर वीवी का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया. राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता बीरेन्द्र सराफ, वरिष्ठ अधिवक्ता सुबोध धर्माधिकारी और मुख्य सरकारी वकील देवेन चौहान ने पैरवी की.

प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत

सोमवार को याचिकाकर्ता चौधरी की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील सुनील मनोहर ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता पर एकतरफा कार्रवाई की गई है. उन्हें प्राकृति न्याय के सिद्धांत के अंतर्गत अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया. जिससे कानून की नजरों में यह कार्रवाई तर्कसंगत नहीं है. जिससे इस कार्रवाई पर तुरंत प्रभाव से अस्थायी रोक लगाने का अनुरोध अदालत से किया गया. सरकार की ओर से पैरवी कर रहे महाधिवक्ता बीरेन्द्र सराफ ने सुनवाई के दौरान बताया कि कुलपति कार्यालय को याचिकाकर्ता के खिलाफ विभिन्न शिकायतें प्राप्त हुई थी. इन शिकायतों में वीवी द्वारा ब्लैक लिस्ट एमकेसीएल कम्पनी को ठेका दिए जाने, टेंडर की प्रक्रिया के बिना ही अलग-अलग कामों का ठेका आवंटित करने, प्राध्यापकों से पैसे वसूली के मामले में नरम रवैया जैसी कई शिकायतें थी. 

समिति ने पाया दोषी

उल्लेखनीय है कि पूर्व वीसी चौधरी के खिलाफ हुई शिकायतों की जांच के लिए उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के उपसचिव अजित बाविस्कर के रूप में समिति का गठन किया गया. समिति की ओर से जांच करने के बाद याचिकाककर्ता को दोषी करार दिया था. समिति की रिपोर्ट में परीक्षा के कामों में एमकेसीएल का चयन और बीना टेंडर निर्माण कार्यों को अनुमति दिए जाने को गंभीरता से लिया गया. पीडब्ल्यूडी के अधीक्षक अभियंता ने भी अपनी रिपोर्ट में टेंडर कार्यवाही के बिना काम आवंटित किए जाने की प्राथमिक रिपोर्ट में जानकारी उजागर की थी. इन शिकायतों के आधार पर ही कुलपति बैस ने चौधरी को इस्तीफा देने के आदेश दिए. किंतु इस्तीफा नहीं दिए जाने के कारण निलंबित करने के आदेश जारी किए. अब फैसला सुरक्षित होने के बाद सभी की नजरें हाई कोर्ट के निर्णय पर लगी हुई है.