13,166 new cases of Kcovid-19 were reported in India in a single day
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    नागपुर. ग्रामीण क्षेत्र के मनोरोगियों के परिजनों के सामने कोविड के बढ़ते मामलों ने मुसीबत पैदा कर दी है. परिजन जब इलाज के लिए प्रादेशिक मनोचिकित्सालय में भर्ती करने के लिए आते हैं तो उनसे कोविड की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट लाने के लिए कहा जाता है. रिपोर्ट के अभाव में उन्हें घंटों सर्दी के इस मौसम में इंतजार करना पड़ता है. ज्यादातर मरीज बाहर ग्रामीण इलाकों से आते हैं इसलिए पहले उन्हें टेस्ट कराने और बाद में रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. यह हालात बीते कई दिनों से चल रहा है.

    बताया जा रहा है कि बीते 15 दिनों के अंदर कुछ कोरोना पॉजिटिव मरीज के चक्कर में यहां के करीब 9-10 लोग संक्रमित हो गए थे. मनोचिकित्सालय में मरीजों को भर्ती करने के लिए आरटी-पीसीआर रिपोर्ट अब जरूरी है. इसलिए इन मरीजों को पहले मेयो व मेडिकल के मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखाना पड़ता है.

    विशेषज्ञों की जांच के बाद मरीज की बीमारी का पता चला है. जरूरत पड़ने पर उसे प्रादेशिक मनोचिकित्सालय में रेफर किया जाता है. यह सिस्टम बीते एक साल से चल रहा है लेकिन अब इसके बीच में कोविड टेस्ट बाधा बना हुआ है. मरीजों के परिजनों का कहना है कि उन्हें कोविड टेस्ट कराने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन रिपोर्ट समय पर नहीं मिल पा रही है. 

    स्टेशन पर गुजार रहे रात

    मनोचिकित्सालय में आने वाले ज्यादातर लोग ग्रामीण इलाकों से आते हैं. धन की कमी होने के कारण वे सरकारी इलाज पर ही निर्भर रहते हैं. सर्दी के दिनों में रिपोर्ट के इंतजार में उन्हें खुले में रात गुजारनी पड़ रही है. जिससे मरीज के साथ आए उनके परिजन भी बीमार होने लगे हैं. वे रात गुजारने के लिए रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या अस्पताल के आसपास बने बस स्टॉप पर रुकने के लिए मजबूर हैं. मनोचिकत्सालय द्वारा मरीजों के परिजनों को ठहराने की कोई व्यवस्था न होने के कारण ज्यादातर लोगों को रुकने के लिए भटकना पड़ता है.