Schools reopen in Himachal Pradesh, classes for class VIII students started from today
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    • 18 महीनों से शाला बंद
    • 36 लाख छात्रों को यूनिफॉर्म देने के आदेश
    • 8,000 आरटीई प्रतिपूर्ति दर 

    नागपुर. सरकार द्वारा हर वर्ष महानगर पालिका, नगर परिषद और जिला परिषद की स्कूलों के छात्रों को गणवेश दिया जाता है लेकिन पिछले 18 महीनों से स्कूल बंद होने से गणवेश वितरण भी अटका हुआ है. छात्र स्कूल में ही नहीं आ रहे हैं तो यूनिफॉर्म का मतबल ही नहीं रह जाता. इस बीच राज्यभर के 36 लाख छात्रों को यूनिफॉर्म देने के लिये केंद्र सरकार ने 216 करोड़ रुपये जारी किये है. अब जब स्कूल ही बंद है तो फिर राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपये बिना वजह कहां खर्च किये जा रहे है, यह सवाल खड़ा हो गया है. 19 मई को केन्द्र के प्रोजेक्ट अप्रुवल बजट की बैठक में सर्व शिक्षा अभियान के तहत महाराष्ट्र को 216 करोड़ रुपये छात्रों के गणवेश के लिए जारी करने पर मुहर लगी. यह निधि राज्य को इसी माह प्राप्त हुई.

    आरटीई फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन कालबांडे ने बताया कि योजना के तहत अब तक यूनिफॉर्म प्रत्यक्ष रूप से छात्रों को दिया जाता था लेकिन सरकार ने इस बार अचानक निर्णय बदलते हुये यूनिफॉर्म बांटने का अधिकार स्कूल प्रबंधन समिति को दे दिया. साथ ही कुछ दिन पहले अन्य बैंकों से सर्व शिक्षा अभियान योजना के तहत स्कूलों के बैंक खाते बंद करने को मजबूर कर दिया. सरकार ने सभी खाते बैंक ऑफ महाराष्ट्र में खोलने का आदेश दिया. आरटीई योजना के तहत किसी भी छात्र को पिछले दस साल से यूनिफॉर्म और किताबें नहीं मिली हैं जबकि अन्य राज्यों में आरटीई छात्रों को उसी वर्ष समय पर किताबें, यूनिफॉर्म और स्कूल भोजन की निधि नियमित रूप से प्रतिपूर्ति प्राप्त हुई है. 

    तिजोरी खाली तो बेवजह खर्च किसलिए

    सरकार का कहना होता है कि उसके पास निधि की कमी है इसी वजह से सरकार ने आरटीई प्रतिपूर्ति दर को 17,670 से घटाकर 8,000 करने का फैसला किया. वहीं दूसरी ओर स्कूल बंद होने के बावजूद 36 लाख छात्रों को स्कूल यूनिफॉर्म देने के लिये केंद्र से प्राप्त हुई 216 करोड़ राशि खर्च करने का आदेश दे रही है. यही वजह है कि इस पूरे मामले में भारी अनियमितता होने का दावा कालबांडे ने किया है. संपूर्ण मामले की जांच करने और दोषी अधिकारियों को तत्काल निलम्बित करने की मांग फाउंडेशन के उपाध्यक्ष राम वंजारी, कोषाध्यक्ष रमेश शेंडे, राजेंद्र अतकर, शाहबाज शेख, एम. दरवेकर, प्रदीप सुतोने, विजय अगड़े, अनुपमा दास ने की.