Court approves sacking of 12 Manpa employees, High Court validates Munde's decision

    • 57 बैंक खाते हुए थे सील
    • 32 सम्पत्तियां भी हुई थीं जब्त

    नागपुर. श्रीसूर्या कम्पनी के माध्यम से हजारों निवेशकों के साथ धोखाधड़ी किए जाने के बाद संचालक समीर जोशी एवं अन्य के खिलाफ पुणे, अमरावती, अकोला और नागपुर जैसे अनेक शहरों में मामले दर्ज किए गए. इन मामलों में जमानत के लिए जोशी की ओर से अब तक कई बार अर्जी दायर की गई किंतु राहत नहीं मिल पाई.

    इसी तरह की एक जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश विनय जोशी ने  आदेश दिए कि निचली अदालत में चल रही सुनवाई की वास्तविकता न केवल रिपोर्ट के रूप में हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी है, बल्कि याचिकाकर्ता के पक्ष को भी उपलब्ध कराना है. सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा दिए गए आदेशों के अनुसार रिपोर्ट पेश करने के लिए सरकार की ओर से समय प्रदान करने का अनुरोध किया गया जिसके बाद अदालत ने 16 सितंबर तक का समय प्रदान किया. 

    हाई कोर्ट ने निर्धारित किया था समय

    उल्लेखनीय है कि श्रीसूर्या का मामला उजागर होने के बाद ईओडब्ल्यू की ओर से इसकी जांच की गई. जांच के दौरान कुल 57 बैंक खाते सील किए गए. इनके अलावा 32 सम्पत्तियां भी जब्त की गई थीं. याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने अदालत से कहा कि इस मामले में हाई कोर्ट ने निर्धारित समय में मामलों की सुनवाई करने के आदेश 30 अगस्त 2019 को ही दिए थे.

    आदेशों के अनुसार अदालत ने डेढ़ वर्ष का समय भी प्रदान किया था जिसके अनुसार 24 फरवरी 2021 तक सुनवाई पूरी होनी चाहिए थी लेकिन इसके बाद अदालत की ओर से पुन: समय दिया गया या नहीं एवं निचली अदालत में सुनवाई की वर्तमान स्थिति क्या है, इसकी जानकारी दोनों पक्षों के पास नहीं है. 

    परिपूर्ण जानकारी जरूरी

    • लगभग 8 वर्ष से याचिकाकर्ता जेल में बंद है. इसके पूर्व जमानत की अर्जियां ठुकराई जा चुकी हैं किंतु अब निचली अदालत में सुनवाई में हो रही देरी का हवाला देते हुए राहत देने का अनुरोध किया जा रहा है. 
    • निचली अदालत में सुनवाई की क्या वास्तविकता है, इसकी जानकारी सरकारी वकील के पास भी नहीं है, जबकि अब तक एक भी गवाह के बयान दर्ज नहीं होने तथा केवल आरोप तय किए जाने की जानकारी उजागर की जा रही है. 
    • अत: जमानत की अर्जी का निपटारा करने के लिए परिपूर्ण जानकारी जरूरी है. अदालत ने आदेश में कहा कि क्या निचली अदालत को पुन: समय दिया गया, इसकी जानकारी भी उजागर की जानी चाहिए. 
    • साथ ही चार्जशीट कितने पन्नों की है. पूरे मामले में कितने अभियुक्त शामिल हैं. उनमें से कितने लोगों को जमानत दी गई, इसकी जानकारी भी रिपोर्ट में देने आदेश दिए.