Nagpur ST Bus Stand

    नागपुर. कोरोना महामारी के संकट में चल रहे एसटी महामंडल की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही. अब महामंडल के पास डीजल की भारी कमी का महासंकट सामने आया है. मंगलवार को गणेशपेठ बस स्टैंड पर डीजल न होने से बसें दोपहर तक नहीं चलीं और 100 से फेरियां नहीं हो सकीं. हालांकि संबंधित अधिकारी नहीं चलीं और रद्द हुईं फेरियों का सही आंकड़ा देने से कतराते रहे. इससे जिले समेत अन्य शहरों के हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. 

    1.40 लाख किमी प्रति दिन

    कोरोना महामारी के बीच जारी लॉकडाउन के बाद जैसे-तैसे एसटी परिवहन पटरी पर लौट रहा है. नागपुर विभाग में हर दिन बसें 1.40 लाख किमी का सफर करती हैं. इससे विभाग को हर दिन 30 से 35 लाख रुपये की आय हो रही है. बावजूद इसके महामंडल नुकसान में ही बताया जाता है. इस बीच मंगलवार को उजागर हुई डीजल की कमी ने यात्रियों की दी जाने वाली सुविधाओं के दावों की पोल खोल दी. एक दिन पहले डीजल जमा नहीं करने से दोपहर 12 बजे तक कोई भी स्टैंड से बस बाहर नहीं जा सकी. हालांकि सावनेर, रामटेक, काटोल व उमरेड डिपो से नागपुर आकर यहां से जाने वाली बसें चलती रहीं.

    त्योहारी सीजन में कैसे होंगी एक्स्ट्रा फेरियां

    गणेशोत्सव के साथ ही त्योहारी सीजन शुरू हो गया है. नवरात्रि जारी है और कुछ दिन बाद दशहरा, फिर दिवाली आने वाली है. ऐसे में आम दिनों की तुलना में एसटी बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ गई है. वहीं लॉकडाउन के प्रतिबंधों में ढील के कारण यात्रियों ने बसों में सफर शुरू कर दिया. इससे घाटे में चल रही एसटी को कमाई का अवसर है लेकिन बसों में डीजल ही नहीं होगा तो चलेंगी कैसे. सूत्रों के अनुसार मुख्य अधिकारी की ओर से डीजल के लिए किसी तरह की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं की गई थी. यही कारण है कि मंगलवार को गणेशपेठ स्टैंड पर अचनाक डीजल की कमी का संकट हो गया. बताया जा रहा है कि बुधवार को भी ऐसी ही स्थिति नजर आ सकती है. इसका कारण पर्याप्त मात्रा में डीजल खरीदी नहीं होना है. 

    जवाब देने से बचते रहे

    गणेशपेठ बस स्टैण्ड पर लगे इस अघोषित जाम की स्थिति से सबसे अधिक परेशानी यात्रियों को हुई. यात्रियों ने बसें न चलने का कारण जानने के लिए विभागीय कार्यालय और पूछताछ केंद्र पर सवाल शुरू कर दिए. वहीं पूछताछ के लिए लगातार फोन बज रहे थे. लेकिन कोई भी कर्मचारी या अधिकारी सही जानकारी नहीं दे रहा था. नागपुर की डिवीजनल ट्रैफिक कंट्रोलर तनुजा कालमेघ ने स्वीकार किया कि डीजल की समस्या हुई है. इसके कारण हर 15 मिनट में चलने वाली बसों को 1 घंटे के बाद रवाना किया जा सका. बसें देरी से चलीं लेकिन रद्द नहीं की गईं.