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    नागपुर. मनपा में हुए स्टेशनरी घोटाले को लेकर अब मनपा प्रशासन के अधिकारियों पर शिकंजा कसता जा रहा है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद से सदर पुलिस ने पीआई विनोद चौधरी के नेतृत्व में अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

    इसके पूर्व 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था किंतु सघन छानबीन के बाद फिर मनपा का एक अधिकारी जाल में फंस गया. बताया जाता है कि पीआई चौधरी के नेतृत्व में टीमें लगातार इस घोटाले की तह तक जाने के लिए अलग-अलग स्थानों को खंगाल रही थीं जिसमें कई बार मनपा मुख्यालय में भी दस्तक दी गई. जांच के दौरान बिलों का भुगतान किस तरह से होता है इसे भी समझा गया.

    इसके बाद गुरुवार की रात को वित्त विभाग के लेखा अधिकारी राजेश मेश्राम को गिरफ्तार किया गया. उल्लेखनीय है कि अब तक गिरफ्तार 4 आरोपियों में जिला सत्र न्यायालय ने ठेकेदार कम्पनी के 2 आरोपियों को एमसीआर में जेल भेज दिया था, जबकि मनपा के ऑडिटर अशफाक और क्लर्क पडवंशी को 24 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया था. शुक्रवार को इन सभी आरोपियों को अब पुन: अदालत में पेश किया जाएगा.

    हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव जब्त

    जिला सत्र न्यायालय में आरोपियों की हिरासत मांगते समय पुलिस की ओर से बताया गया था कि यह केवल 67 लाख का घोटाला नहीं है, बल्कि काफी बड़ा वित्तीय घोटाला होने की संभावना है. प्रशासकीय अधिकारी और कर्मचारियों से साठगांठ कर इसे अंजाम दिया गया है. यही कारण है कि पूरी जांच के लिए समय देने का अनुरोध किया गया. पुलिस ने सघन जांच का दावा किया था जिसके अनुसार इस मामले में अब सबसे अहम सबूत हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव भी जब्त किए.

    माना जा रहा है कि हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव से काफी धांधली उजागर हो सकती है जिससे मामले में अभी और अधिकारी और कर्मचारियों पर गिरफ्तारी की तलवार अटकी हुई है. सूत्रों के अनुसार हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव से मिलने वाली जानकारी के आधार पर किस विभाग के कौनसे अधिकारी और कर्मचारियों शामिल हैं, इसका पता लगाया जा रहा है.

    मनपा की चल रही लीपापोती

    एक ओर पुलिस कड़ा संघर्ष कर मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है, किंतु मनपा आयुक्त द्वारा जांच के लिए बनाई गई समिति के हाथ कुछ भी नहीं लग रहा है. समिति की इस तरह की कार्यप्रणाली पर काफी आश्चर्य जताया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार मनपा के पास पूरा आईटी विभाग है. किस तरह से घोटाला हुआ होगा, इसकी जांच करना मनपा के लिए चुटकियों का काम है.

    इसके बावजूद जांच के नाम पर केवल लीपापोती चल रही है. समिति की कार्यप्रणाली का आलम यह है कि हर दिन अलग-अलग विभागों के प्रमुखों बुलाकर जानकारी मांगी जा रही है. सूत्रों के अनुसार इस तरह की जांच से प्रशासन के हाथों में कुछ लगना संभव नहीं है जिससे पुलिस की जांच पर ही सभी की नजरें अटकी हुई हैं.