APMC Nagpur

    • कांग्रेस की बैठक आज संभव, बीजेपी का पता नहीं 
    • 1,200 वोट हुए कम

    नागपुर. कृषि उत्पन्न बाजार समिति(एपीएमसी) चुनाव को लेकर तिथि का ऐलान होने के साथ ही पार्टियों के साथ-साथ उम्मीदवारों के बीच हलचल तेज हो गई है. इस वर्ष वोट कम होने के कारण भी चुनाव दिलचप्स होने की संभावना जताई जा रही है. कांग्रेस अपना पैनल मैदान में उतारेगा यह तय हो गया है लेकिन इसे लेकर बैठक रविवार को होने की संभावना है लेकिन बीजेपी को लेकर अभी तक कोई हलचल नहीं है. जानकारों ने बताया कि फार्म भरने की तारीख 20 से 24 तक है जो भी होना है 20 तक होना है. इसलिए अभी से ही उत्सुक उम्मीदवार अपनी-अपनी लॉबिंग शुरू कर दी है.

    बताया जाता है कि आढ़तिया-व्यापारी वर्ग में ही कम से कम 1,200 वोट कम हो गए हैं जिसके कारण चुनाव में रोचकता बढ़ने की संभावना है. 2012 में 3,200 से अधिक वोटर इस वर्ग में थे लेकिन इस बार घटकर 2,100 के करीब रह गए हैं. सूत्रों ने बताया कि अधिकांश मार्केट से वोटर कम हुए हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि काफी समय तक प्रशासक का शासन था जिसके कारण लाइसेंस रिन्यूअल नहीं हो पाया. इसका खामियाजा सभी बाजार को उठाना पड़ा है. इसी प्रकार जीएसटी आने के बाद कई व्यापारी केवल एक लाइसेंस ही रिन्यू कराएं हैं जबकि कइयों के पास 2-3 लाइसेंस थे. ऐसे कई लोगों ने 2-2 लाइसेंस का रिन्यूअल नहीं कराया जिससे भी वोटर कम हुए हैं. 

    रविवार को होगा निर्णय

    रविवार को दोनों ही पक्षों की बैठक होने की पूरी-पूरी संभावना जताई जा रही है. अब तक कलमना एपीएमसी में सुनील केदार गुट का वर्चस्व रहा है भविष्य में अपनी पकड़ को बनाये रखने के लिए केदार एड़ी चोटी का जोर लगाएंगे. इसके लिए उनके मार्गदर्शन में रविवार को बैठक होने की संभाना है. रविवार को ही व्यापारी-आढ़तिया वर्ग के नामों का भी चयन होना तय बताया जा रहा है. वर्तमान में 4 नामों की चर्चा चल रही है. 

    BJP मूड में 

    2012 के चुनाव में बीजेपी चुनाव में नहीं थी लेकिन इस बार चुनाव लड़ने के मूड में है. कई विधायकों ने अपनी सहमति दिखाई है. चूंकि चुनाव में संपूर्ण ग्रामीण भाग का प्रतिनिधित्व होता है इसलिए सहमति बनाई जा रही है कि इस बार पूरा का पूरा पैनल उतारा जाए. इसे लेकर कई नेता आपस में बातचीत भी कर रहे हैं. विधायक कृष्णा खोपड़े ने कहा कि जिस प्रकार पूर्व कार्यकारिणी ने घोटाला दर घोटाला किया था उसे कहीं न कहीं रोकना होगा, इसलिए बीजेपी अपना पैनल उतारने पर गंभीरता से विचार कर रही है.