Posthumous donation of corona virus on organ donation, loss of life for needy patients

    नागपुर. इकलौती औलाद के अचानक चले जाने का गम क्या होता है, यह वही माता-पिता जानते हैं जिन्होंने खोया है. 18 वर्षीय बेटे की असमय मृत्यु से माता-पिता टूट गये थे लेकिन अपना संयम नहीं खोया. डॉक्टरों द्वारा काउंसिलिंग करने पर मृत बेटे के अवयव दान करने के लिए वे तैयार हो गये. ब्रेन डेड बेटे की दोनों किडनी और लीवर के साथ ही दोनों आंखें भी दान की गईं. 

    18 वर्षीय तीर्थ देवांग ने 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और नये जीवन में प्रवेश करने जा रहा था कि काल का चक्र ऐसा चला कि हंसते-खेलते परिवार की खुशियां चकनाचूर हो गईं. जगत रेसिडेंसी भंडारा रोड में तीर्थ अपने पिता देवांश शाह और मां दर्शना शाह के साथ रहता था. तीर्थ को अचानक सिरदर्द हुआ और उ‌ल्टी होने लगी. अचानक बेहोशी की अवस्था में उसे सोमवार को न्यू इरा अस्पताल लकड़गंज में भर्ती किया गया.

    भर्ती के वक्त उसकी स्थिति गंभीर होने के कारण उसे वेंटिलेटर पर रखा गया. उसके ब्रेन में रक्त स्राव हुआ था. डॉक्टरों ने अथक परिश्रम किये लेकिन ब्रेन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. बुधवार को न्यूरो सर्जन डॉ. नीलेश अग्रवाल ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया. इसके बाद डॉ. अग्रवाल, कार्डियक सर्जन आनंद संचेती, कार्डियोलाजिस्ट निधीष मिश्रा के मार्गदर्शन में परिजनों को अवयव दान के लिए प्रेरित किया गया. 

    न्यू इरा में 44वां लीवर ट्रांसप्लांट 

    माता-पिता के लिए वक्त बहुत बुरा था लेकिन संयम से काम लेते हुए अवयव दान के लिए तैयार हो गये. इसके बाद जोनल ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन सेंटर (जेडटीसीसी) की अध्यक्ष डॉ. विभावरी दाणी व सचिव डॉ. संजय कोलते को जानकारी दी गई. वीना वाठोरे ने प्रक्रिया पूर्ण करने में मदद की. तीर्थ की एक किडनी वोक्हार्ट अस्पताल में प्रत्यारोपित की गई जबकि दूसरी किडनी न्यू इरा अस्पताल में 66 वर्ष के बुजुर्ग को दी गई. लीवर भी न्यू इरा अस्पताल में एक 56 वर्षीय मरीज को दिया गया. यह न्यू अस्पताल का 44वां लीवर और 36वां किडनी ट्रांस प्लांट था. ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया डॉ. प्रकाश खेतान, डॉ. रवि देशमुख, डॉ. साहिल बंसल, डॉ. स्नेहा खाडे, डॉ. राहुल सक्सेना ने पूर्ण की.