Neighbour slams a young man on the ground for playing loud music in Mumbai, he dies

    नागपुर. न्यू नंदनवन परिसर में शनिवार को हुई देवकी जीवनदास बोबड़े (78) की हत्या में 24 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लगा है. घर का सारा सामान सुरक्षित होने के कारण पुलिस को हत्या के पीछे बड़ी साजिश लग रही है. हालांकि यह साजिश किसने और क्यों रची इसका कोई सुराग हाथ नहीं लगा है. इसीलिए पुलिस परिवार से संबंधित हर व्यक्ति से पूछताछ कर रही है. देवकी वैद्यकीय अधिकारी पद से सेवानिवृत्त थी. घर पर उनके पति जीवनदास के अलावा कोई नहीं था लेकिन वो भी लकवाग्रस्त होने के कारण लंबे समय से बेड पर ही रहते हैं. वृद्ध दंपति की किसी से दुश्मनी नहीं हो सकती. न घर में किसी प्रकार की लूटपाट हुई है. ऐसे में यह मामला पुलिस के लिए टेढ़ी खीर बनती जा रही है. पुलिस को संदेह है कि किसी करीबी व्यक्ति ने ही यह घात किया है.

    जिसे घर और परिवार की गतिविधियों की पूरी जानकारी थी. हत्या करने वाला यह जानता था कि दोपहर के वक्त देवकी और उनके पति जीवनदास घर पर अकेले रहते हैं. किसी अज्ञात व्यक्ति का घर में प्रवेश करना संभव नहीं है. अनुमान लगाया जा रहा है कि 1 से 3 बजे के बीच ही वारदात को अंजाम दिया गया. आरोपी ने अपने पीछे कोई सुराग नहीं छोड़ा है. इसीलिए रविवार को पुलिस ने पूरे घर की बारीकी से तलाशी ली. नंदनवन और क्राइम ब्रांच की टीमें जांच में जुटी हुई है. 

    19 हत्याकांडों का नहीं मिला सुराग

    इसके पहले भी शहर में सीनियर सिटीजन की घर में घुसकर हत्या की गई. वर्ष 2013 से 2021 तक ऐसे 20 मामले हैं जो पुलिस अब तक नहीं सुलझा पाई है और कोई सबूत नहीं मिलने के कारण जांच ठंडे बस्ते में चली गई. कुछ अनसुलझे मामलों पर नजर डाले तो वर्ष 2014 में वाड़ी में भगवती चंदा (70) और सरोजबाई की हत्या हुई थी. 12 जुलाई 2014 को नरेंद्रनगर की दीन प्रजाहित सोसायटी में रोशनी पेटकर को घर में मौत के घाट उतारा गया. वर्ष 2015 में तात्या टोपेनगर में रहने वाली वैज्ञानिक आनंद भाल की पत्नी जयश्री भाल (69) को दिनदहाड़े मौत के घाट उतारा गया. वाड़ी के डिफेंस परिसर में स्थित काली माता मंदिर के पुजारी जगन कोड़ापे की अज्ञातों ने मंदिर के त्रिशुल से वार कर हत्या की थी. सितंबर 2016 में अज्ञातों ने सेंट्रल एवेन्यू रोड पर आर्किटेक्ट एकनाथ निमगड़े को गोली मारकर मौत के घाट उतारा था.

    शहर पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं होने के कारण इस प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंप दी गई लेकिन अब तक कोई आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ है. 17 नवंबर 2016 को कोराडी थाना क्षेत्र में प्रमिला मारोतराव कानफाड़े की घर में हत्या कर दी गई. वर्ष 2017 में हुड़केश्वर के न्यू म्हालगीनगर में सुमंताबाई हरिभाऊ देवले (75) की गला घोटकर हत्या की गई. इसी वर्ष मानकापुर थानांतर्गत भैयालाल बैस की हत्या हुई. इस मामले में भी पुलिस को कोई ठोस सबूत नहीं मिलने के कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया. ऐसे और भी कई मामले हैं. अब देखना ये है कि देवकी बोबड़े हत्याकांड में पुलिस के हाथ आरोपी के गिरेबान तक पहुंच पाते है या नहीं.